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कोर्ट अपने ही फैसलों के साथ मजाक क्यों होने दे रहा है- निर्भया की मां

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अक्षय की दया याचिका पर 2012 दिल्ली गैंगरेप पीड़िता की मां आशा देवी ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि, हमें आश्चर्य इस बात का है कि, न्यायालय ने जो 2017 में फांसी की सजा सुनाई थी वो अपने ही फैसले पर अमल क्यों नहीं कर पा रहा है। न्यायालय अपने ही फैसलों के साथ मजाक क्यों होने दे रहा है?

इसके साथ ही पीड़ित मां आशा देवी ने कहा कि, कोर्ट की तरफ से दोषियों के लिए जितनी बार फांसी की सजा टल रही है, उससे लोगों में एक गलत संदेश जा रहा है। लोगों का न्याय व्यवस्था से विश्वास हट रहा है। मैं और मेरा परिवार सात साल तीन महीने से संघर्ष कर रहा है लेकिन आज भी मेरे हाथ में कुछ नहीं है।

आपको बता दें कि, निर्भया के दोषी विनय को उच्च स्तरीय चिकित्सा का मांग करने वाली याचिका को दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने खारिज कर दिया। अदालत ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था कि, ऐसे दोषी जिन्हें मौत की सजा सुनाई गई हो, उनका चिंतित और अवसाद में होना सामान्य है। इस मामले में जाहिर तौर पर दोषी को पर्याप्त चिकित्सा उपचार और मनोवैज्ञानिक सहायता दी गई है।

इस मामले में अब तक व तीसरी बार डेथ वॉरंट जारी किया जा चुका है और उसके मुताबिक तीनों को 3 मार्च की सुबह 6 बजे फांसी दी जानी है लेकिन दोषियों को बचाव के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है। कभी दोषी खुद को मानसिक रोगी बतात रहे हैं, तो कभी यह तर्क देते हैं कि वह घटना के वक्त नाबालिग थे।

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