Home मीडिया जगत बिहार का एक ऐसा गांव जहां चार साल से लागू है सोशल डिस्टेंसिंग, लॉकडाउन के बाद गांव को किया सैनेटाइज

बिहार का एक ऐसा गांव जहां चार साल से लागू है सोशल डिस्टेंसिंग, लॉकडाउन के बाद गांव को किया सैनेटाइज

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बिहार के कटिहार जिला की सीमा पर बसे दो सौ घरों वाले दीवानगंज महलदार गांव के लोग पिछले चार वर्षों से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहे हैं। साल 2016 के फरवर महीने में इस गांव में चेचक समेत अन्य चर्म रोग का प्रकोप फैला था। उन दिनों डब्लूएचओ की एक टीम आई थी, जिसने सोशल डिस्टेंसिंग का पाठ पढ़ाया था। गांव में बस्ती घनी थी और साफ-सफाई का अभाव था। इसलिए टीम ने कहा था कि सफाई और सामाजिक दूरी बनाकर रखें। अधिकांश मजदूरों वाले इस गांव में जो भी नया घर बना है, दूर-दूर ही बना है। मिली जानकारी के अनुसार कुछ पढ़े-लिखे लोग समय-समय पर गांववासियों को  इस संबंध में सचेत करते रहते हैं और जरूरी मदद भी देते हैं। जिला परिषद सदस्य संजीव कुमार कहते हैं कि चार साल से इस गांव में किसी बीमारी ने दस्तक नहीं दी है जिससे उनका मनोबल बढ़ा है। 

आदत में हो गया है शुमार
जिला परिषद सदस्य विवेका यादव बतातें है कि इस टोला के लोग सोशल डिस्टेंस से अनभिज्ञ नहीं हैं। सोशल डिस्टेंस में रहना आदत में शुमार हो गया है। टोला के मिडिल स्कूल में पढ़ने और खेलने में भी बच्चे  सोशल डिस्टेंस बनाकर रखते हैं। स्थानीय लोग भी दूरी बनाकर ही बैठते हैं, ताकि दोबारा परेशानी का सामना नहीं करना पड़े । इसी टोला के रहने वाले विद्यानन्द मंडल, रंजीत कुमार, रोहित कुमार, गौरव कुमार, विजय कुमार, मनीष महलदार, किशन महलदार, मनोज रजक, विनोद महलदार, श्रवण जायसवाल, मोहित रजक बताते हैं सोशल डिस्टेंसिंग की जानकारी हमलोगों को पहले से ही है। डिमिया छतरजान पंचायत के मुखिया प्रदीप साह ने बताया कि लॉकडाउन के बाद गांव को सैनेटाइज करवा दिया गया है। ब्र्लींचग पाउडर का छिड़काव भी हो गया है। गांव के लोग पहले से साफ-सफाई और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर ही रहे हैं।

तीन सौ से अधिक लोग हुए थे प्रभावित
वर्ष 2016 के फरवरी माह में एक आदमी परदेस से आया था। उसके कुछ दिनों बाद गांव में चेचक व अन्य चर्मरोग का शिकार होने लगे थे लोग। कुछेक की मौत हो भी गई। एक माह के अंदर बीमारी पूरे गांव में फैल गई। मामला विधानसभा में भी उठा। सरकारी हस्तक्षेप के बाद डब्लूएचओ की टीम ने दौरा किया। टीम यहां कई दिनों तक रही और सोशल डिस्टेंसिंग का पाठ पढ़ा गई। नतीजा यह हुआ कि महामारी दोबारा नहीं लौटी।

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