Home ताजा खबर कोरोना वायरस को लेकर राबड़ी ने बिहार की डबल इंजन सरकार पर कसा तंज, सुशील मोदी ने दिया ये जवाब

कोरोना वायरस को लेकर राबड़ी ने बिहार की डबल इंजन सरकार पर कसा तंज, सुशील मोदी ने दिया ये जवाब

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बिहार में कोरोना वायरस को लेकर सियासत भी हो रही है। लॉकडाउन संकट में बिहारी मजदूरों की सुविधा नहीं मिलने को लेकर बिहार की पूर्व मुख्‍यमंत्री राबड़ी देवी ने डबल इंजन की सरकार पर करारा तंज कसा, तो उप मुख्‍यमंत्री सुशील मोदी ने पलटवार किया है। 

पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने लॉकडाउन के चलते दूसरे राज्यों में फंसे बिहारियों का पक्ष लेते हुए केंद्र सरकार पर भेदभाव करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि भाजपा के एक सांसद की पहल पर दक्षिण भारत के हजारों लोगों को 25 बसों में बनारस से महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्रप्रदेश भेजा गया। इस दौरान बसों में सोशल डिस्टेसिंग के नियमों का भी उल्लंघन हुआ। राबड़ी ने पूछा कि क्या इस देश में दो कानून है? गुजरात की भाजपा सरकार लॉकडाउन के दौरान ही उत्तराखंड में फंसे हजारों लोगों को आरामदायक बसों में बैठाकर गुजरात ले जा सकती है, यूपी की सरकार अपने नागरिकों के लिए दिल्ली से दो सौ बसों का प्रबंध कर सकती है तो क्या बिहार की डबल इंजन की सरकार दूसरे राज्यों में फंसे बिहारियों को लाने का प्रबंध नहीं कर सकती है? जब दूसरे राज्य ऐसा कर सकते हैं तो बिहार क्यों नहीं? क्या बिहार ही सब भुगतेगा? 

बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने बुधवार को लॉकडाउन और कोरोना संकट को लेकर राजनीति करने वाले विरोधियों पर ट्वीट कर निशाना साधा। उन्होंने लिखा है कि जो संक्रामक बीमारी न मजहब देखती है, न अमीरी-गरीबी, उससे निपटने में भी भेदभाव की ओछी राजनीति करने वाले दल इंसानियत के गुनहगार माने जाएंगे।

मोदी ने लिखा है कि बिहार के गरीब लोग भी अब हवाई यात्रा करते हैं। बैलगाड़ी और बस से सफर कर खाड़ी के देशों में रोजगार पाने नहीं जाते। इनमें से बड़ी संख्या में जो कोरोना संक्रमित लोग राज्य के विभिन्न जिलों में लौटे, उनकी लापरवाही से इस महामारी के विरुद्ध लड़ाई कमजोर हुई। सिवान के एक ही परिवार के 23 लोग और मुंगेर में एक व्यक्ति के कारण 13 लोग संक्रमित हुए और पूरे इलाके को हॉट स्पॉट घोषित करना पड़ा।

कोरोना जैसी वैश्विक महामारी से निपटने में टाटा, महेंद्रा, अंबानी से लेकर बिल गेट्स तक ने खुल कर दान दिया है। स्थानीय स्तर पर भी संपन्न लोग गरीबों के लिए हर प्रकार की मदद कर रहे हैं। लेकिन जिन लोगों ने सत्ता में आने पर करोड़ों रुपये की बेनामी संपत्ति बनाई, काम के बदले जमीनें लिखवाईं और जांच एजेंसियों को अपनी अकूत अमीरी का बिंदुवार ब्योरा नहीं दिया, वे इस मुश्किल दौर में अवैध तरीके से अर्जित संपत्ति का कुछ हिस्सा दान करने के बजाए सरकार और समाज के योगदान की अनदेखी कर रहे हैं। 

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