Home Breaking News रिजर्व बैंक के बाद देश की निगाह आर्थिक पैकेज पर, 20 अप्रैल तक घोषणा संभव

रिजर्व बैंक के बाद देश की निगाह आर्थिक पैकेज पर, 20 अप्रैल तक घोषणा संभव

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शुक्रवार को धन की देवी लक्ष्मी का दिन मानना कुछ ठीक साबित करते हुए रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने अर्थव्यवस्था में तरलता के उद्देश्य से उत्साह बढ़ाने वाली घोषणा कर दी है। इससे बड़े कार्पोरेट घराने से लेकर बैंकों और देश के उद्योगों को काफी फायदा होगा। सुस्त पड़ी आर्थिक चाल में गति आएगी।
लेकिन इसके साथ-साथ कॉर्पोरेट घरानों, सूक्ष्म, लघु और मझोले इंटरप्राइजेज की निगाह केंद्र सरकार के त्वरित आर्थिक पैकेज (स्टिमुलस) पर टिकी है। गुरुवार को प्रधानमंत्री ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और मंत्रालय के अधिकारियो के साथ लंबी चर्चा की है। उम्मीद है कि 20 अप्रैल से पहले इस पैकेज की कभी भी घोषणा हो सकती है।

केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्योगों (एसएमई) के मंत्री नितिन गडकरी के करीबी बताते हैं एसएमई क्षेत्र को वेतन के मद में 10 हजार करोड़ रुपये की राहत मिल सकती है। इसके अलावा केंद्र सरकार कई अन्य तरह की राहत देने पर विचार कर रही है।उच्चपदस्थ सूत्र बताते हैं कि स्टिमुलस पैकेज वित्तीय घोषणा के तहत है। इसलिए केंद्र सरकार बहुत फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। सरकार चाहती है कि कोविड-19 का संक्रमण फैलने से रोकने के लिए उठाए गए कदमों का अर्थव्यवस्था पर बुहत बड़ा असर न पड़ने पाए।

असर गहरा हुआ तो  इससे जहां देश की विकास दर प्रभावित होगी, वहीं उत्पादन क्षेत्र में बड़ा झटका लगने से बेरोजगारी काफी खतरनाक रूप ले सकती है। इसलिए किसी पैकेज की घोषणा से पहले सरकार विभिन्न मंत्रालयों, नीति आयोग और केंद्रीय वित्त मंत्रालय की राय को अहमियत दे रही है।इसलिए राहत पैकेज की घोषणा होने में एक-दो दिन का समय लग सकता है।

आरबीआई ने अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए कर दिया अपना काम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रिजर्व बैंक की घोषणा का स्वागत किया है। उन्होंने कहा है कि इससे तरलता आएगी। सीआईआई (नार्थ इंडिया) के चेयरमैन दिनेश दुआ ने भी कहा कि केंद्रीय बैंक ने अपना काम कर दिया है। माइक्रोइकोनामिक्स की समझ रखने वाले डीके पंत भी इसे अच्छा मानते हैं।

रिजर्व बैंक के एक वरिष्ठ सूत्र का कहना है कि यह निर्णय बहुत विचार-विमर्श के बाद लिया गया है। इससे देश के लघु, सूक्ष्म, मझोले और बड़े उद्योगों को फायदा होगा। राज्यों को केविड-19 संक्रमण से निबटने में मदद मिलेगी और मध्य वर्ग को भी इससे राहत मिलेगी।

सूत्र का कहना है कि रिजर्व बैंक के गवर्नर ने नकदी को लेकर आश्वासन दिया है और भारत के आर्थिक फंडामेंटल काफी मजबूत हैं। इसलिए कुछ समय के बाद देश में मांग भी बढ़ेगी और अर्थव्यवस्था में तेजी भी आएगी।भारत की 1.99 फीसदी के करीब आंकी जा रही जीडीपी ग्रोथ में भी जबरदस्त सुधार होगा। सूत्रों का मानना है कि अगले दो-तीन महीने बाद सब कुछ पटरी पर आता दिखेगा।

कॉर्पोरेट जगत, एसएमई समेत अन्य को क्या है उम्मीद?
कॉर्पोरेट जगत की निगाह केंद्र सरकार के स्टिमुलस पैकेज पर है। दिनेश दुआ कहते हैं कि किसी प्रभावी पैकेज के ऐलान किए बिना काम चलने वाला नहीं है। चाहे बड़ा उद्योग हो या छोटा दशा सबकी खराब है। एसएमई के पास अपने कर्मचारियों को देने के लिए अगले महीने से न तो तनख्वाह है, न ही बिजली, पानी के बिल, रोजमर्रा का खर्चा संभालने की स्थिति।

इसलिए लॉकडाउन से छूट मिलने के बाद भी अभी ये उत्पादन की स्थिति में मुश्किल से आएंगी। बताते हैं, कई अच्छी दवा कंपनियों की स्थिति काफी खराब है। एविएशन, होटल, पर्यटन या हास्पिटैलिटी से जुड़ी कंपनियों के बारे में कुछ कहना ही बेकार है।वह न जाने कब अपने पैर पर खड़ी हो पाएंगी। एसएमई फेडरेशन के अनिल भारद्वाज का भी कहना है कि बिना सरकार की मदद के यह क्षेत्र खड़ा नहीं हो सकता। इसलिए केंद्र सरकार को आगे आना होगा।

दूसरी बड़ी समस्या गरीबों, मजदूरों, गांव और दूर-दराज के लोगों की भी है। सरकार ने कृषि क्षेत्र को खोल दिया है, लेकिन अन्य का कामधंधा चौपट होने से इन्हें भी रोटी, राहत चाहिए। ग्रामीण विकास मंत्रालय के एक अधिकारी ने भी माना कि देश इस समय विशेष स्थिति से गुजर रहा है। इसलिए सरकार उचित कदम उठाने पर विचार कर रही है।

रिजर्व बैंक ने क्या किया

  • केंद्रीय बैंक ने 27 मार्च को रेपो रेट में 75 बेसिस प्वाइंट की कटौती की थी और रिवर्स रेपो रेट में 90 बेसिस प्वाइंट की कटौती की थी। इस तरह से रेपो रेट 4.40 फीसदी पर और रिवर्स रेपो रेट चार फीसदी पर आ गया था। शुक्रवार को केंद्रीय बैंक ने बिना सीआरआर और रेपोरेट में कटौती किए (4.4 पर स्थिर), रिवर्स रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइट की कटौती की घोषणा (अब 3.75) की है। इस कटौती के बाद बैंक अब रोजमर्रा के कामकाज के बाद बची धनराशि को केंद्रीय बैंक में जमा कराने के बजाय, इसे कर्ज देने में प्रयोग में लाएंगे। इसके लिए उन्हें प्रोत्साहन मिला है। इससे बैंकों के पास नकदी उपलब्ध रहेगी।
  • रिजर्व बैंक ने 50 हजार करोड़ रुपये गैर बैंकिंग वित्तीय क्षेत्र, एमएफआई के लिए सहायता राशि की घोषणा की है। इससे पूंजी बाजार में तरलता को बढ़ावा मिलेगा। केंद्रीय बैंक लक्षित दीर्घकालिक रेपो परिचालन (एलआरटीआरओ) के जरिए यह सहायता देगा।
  • आरबीआई ने 25 हजार करोड़ रुपये नाबार्ड, 15 हजार करोड़ रुपये सिडबी और 10 हजार करोड़ रुपये नेशनल हाउसिंग बैंक के लिए जारी करने की घोषणा की है। इसके साथ-साथ बैकों द्वारा मौजूदा कर्ज की वापसी पर लगाई गई रोक पर 90 दिन का एनपीए नियम न करने का निर्णय लिया है। बैंक को कोविड-19 के कारण आई प्रतिकूल वित्तीय स्थिति को देखते हुए लाभांश के भुगतान से छूट दी गई है।
  • राज्यों की अग्रिम भुगतान सुविधा (डब्ल्यूएमए) को 60 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है। इससे राज्यों के सामने संसाधन जुटाने की चुनौती काफी आसान हो जाएगी।
  • कमर्शियल रियल्टी प्रोजेक्ट लोन को एक साल का विस्तार दे दिया है।
  • केंद्रीय बैंक ने जानकारी दी है कि उसके पास सात लाख करोड़ का रिजर्व है। फिलहाल किसी तरह की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।

विपक्ष के नेताओं, राज्यों के मुख्यमंत्रियों की भी है मांग


विपक्ष के नेता और राज्य के मुख्यमंत्री भी केंद्र सरकार से राहत पैकेज की मांग कर रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, महासचिव और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, राजस्थान के अशोक गहलोत समेत अन्य ने केन्द्र सरकार से अपनी मुट्ठी खोलने की अपील की है।

राहुल गांधी ने इसे न्याय योजना मानते हुए प्रधानमंत्री से मांग की है कि उन्हें गरीब, मजदूर, किसान, लघु, छोटे, मझोले उद्योगों, के लिए राहत पैकेज की घोषणा करनी चाहिए ताकि देश में बेरोजगारी की भयावह तस्वीर से बचा जा सके।

गरीबों के खाते में सब्सिडी का दिया जाने वाला पैसा भेजा जाना चाहिए। अग्रिम भुगतान करना चाहिए। मनरेगा को संजीवनी देनी चाहिए और राज्यों को संसाधन तथा जीएसटी का बकाया दिया जाना चाहिए।

विपक्ष के नेताओं का मानना है कि जब तक सरकार देश के गांवों, विभिन्न क्षेत्रों में पैसा नहीं डालेगी, तबतक न तो लोगों को राहत मिल सकती है और न ही अर्थव्यवस्था के लिए संभावित बड़े झटके को कम किया जा सकता है।


मंत्रालयों पर है भारी दबाव


केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी एसएमई क्षेत्र के दबाव को महसूस कर रहे हैं। वह भूतल परिवहन मंत्री भी हैं। परिवहन व्यवस्था भी ठप है और यह लोगों के रोजगार का बड़ा जरिया है। इस पर चर्चा करने वाले सूत्र बताते हैं कि गडकरी के चेहरे का तनाव साफ देखा जा सकता है।

यही स्थिति रेल मंत्रालय, सिविल एविएशन की है। पर्यटन विभाग के वरिष्ठ सूत्र का कहना है कि चाहे होटल इंडस्ट्री हो या पर्यटन से जुड़ी एजेंसियां, सभी अब सितंबर, अक्टूबर के बाद ही अपने क्षेत्र में कामकाज की संभावना बता पा रही हैं।

नीति आयोग के एक सदस्य का कहना है कि बड़ी मात्रा में मंत्रालयों के सुझाव आ रहे हैं। विभिन्न मोर्चे पर केंद्रीय वित्त मंत्रालय स्थितियों को समझ रहा है। केंद्र सरकार कुछ विशेष योजना बना रही है। इसकी कभी भी घोषणा हो सकती है। सूत्र का कहना है कि कोविड-19 संक्रमण के फैलाव को रोकने में सरकार अभी तक सही रास्ते पर है। आगे भी सब ठीक रहेगा।

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