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स्वामी रामदेव से जाने गले में टॉन्सिल के लक्षण और आयुर्वेदिक उपचार

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गले में दर्द की शिकायत कई बार आम होती है लेकिन इसको ख़ास होते समय नहीं लगता है और ये एक असहनीय पीड़ा देने वाली बीमारी होती है। क्योंकि गले का यह दर्द टॉन्सिलाइटिस का शुरुआती लक्षण भी हो सकता है।

इसमें गले में खरास भी होती है और गले में जलन भी होती है। संक्रमण के कारण मवाद भी हो जाता है, जिसके कारण अत्यधिक दर्द, बुखार भी होता है और ऐसे में समय पर निदान नहीं किया जाए तो यह एक जानलेवा बन सकता है।

किसी प्रकार के बैक्टीरिया या इंफेक्शन के संपर्क में आने से गले के दोनों और दर्द होने लगता है। टॉन्सिल्स में सूजन भी जा जाती है जिससे खाने व पीने के साथ ही सलाइवा निगलने में दिक्कत होने लगती है।

स्वामी रामदेव कहते है, अगर ऐसा होता है तो रोगी को रोज़ कपालभाति प्राणायाम करना चाहिए। उज्जाई प्राणायाम भी फायदेमंद रहता है। रोज़ सुबह गुनगुना पानी पीना चाहिए। बच्चों को टॉन्सिल होता है तो त्रिकुटा चूर्ण फायदेमंद रहता है। चने के बराबर शहद से चटा देना चाहिए।

हल्दी को सेंककर उसको गर्म पानी या दूध के साथ देने से भी गले का इन्फेक्शन नष्ट हो जाता है। अंगूठे के नीचे वाले उठे हुए स्थान को रोज़ दबाएं। इससे लाभ होता है। ज्यादा ठंडा खाना और खट्टी चीज़ों से बचे। फ्रिज का पानी नहीं पीये।

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