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झारखंड ने बाहर फंसे लोगों के लिए लांच किया ‘सहायता’ मोबाइल एप, मिलेंगे 2000 रुपये

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देश के अलग-अलग राज्यों, बाहर फंसे प्रवासी मजदूरों की आर्थिक मदद के लिए झारखंड सरकार ने सहायता मोबाइल एप जारी किया है। इसके जरिये हर श्रमिक को भरण-पोषण केे लिए 2000 रुपये दिए जाएंंगे| झारखंड मुख्यमंत्री विशेष सहायता योजना मोबाइल एप के माध्यम से देशव्यापी लॉक डाउन के कारण विभिन्न राज्यों में फंसे झारखंड के मजदूरों को राज्य सरकार के स्तर से आर्थिक मदद मुहैया कराने की कोशिशें तेज हो गई हैं। इस कड़ी में गुरुवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड मंत्रालय में झारखंड विशेष सहायता योजना मोबाइल एप लांच किया।

इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड विशेष सहायता योजना मोबाइल एप के माध्यम से राज्य सरकार प्रवासी मजदूर भाइयों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। एक सप्ताह के अंदर देश के विभिन्न राज्यों में फंसे ऐसे सभी मजदूरों को चिन्हित कर सरकार आर्थिक उन्हें सहायता राशि उपलब्ध कराएगी। यह राशि सीधे प्रवासी मजदूरों के बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से ट्रांसफर की जाएगी।सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि सभी मजदूरों को कम से कम एक हजार रुपये की सहायता राशि मुहैया कराई जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वैसे तो झारखंड सरकार कोरोना वायरस (कोविड-19) के संक्रमण फैलाव के शुरुआती दिनों से ही अपने सीमित संसाधनों के साथ एहतियाती तैयारी और बचाव कार्य पर प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। लॉकडाउन के प्रथम चरण में भी अधिकारियों की टीम द्वारा राज्य के बाहर फंसे झारखंड के मजदूरों को राशन आदि उपलब्ध कराने के लिए दूसरे राज्यों से लगातार समन्वय बनाया गया है।

गरीबों-जरूरतमंदाें के साथ पूरी संवेदना

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड-19 संक्रमण की इस घड़ी में वर्तमान सरकार झारखंड के मजदूरों, आदिवासियोंं, दलितों, गरीबों व असहाय लोगों के प्रति अपनी पूरी संवेदना के साथ काम कर रही है। बाहर फंसे मजदूरों को सहायता पहुंचाई जा रही है। साथ ही राज्य में रह रहे गरीबों और मजदूरों के भोजन-अनाज का भी इंतजाम किया गया है। 

एक स्मार्ट फोन से जुड़ सकता है मजदूरों का पूरा समूह

मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि यह मोबाइल एप प्रवासी मजदूरों के लिए मील का पत्थर साबित होगा।  विशेष तौर पर अधिकारियों की टीम द्वारा यह मोबाइल एप बनाया गया है। मोबाइल एप का उपयोग वैसे मजदूर भी कर सकेंगे, जिनके पास स्मार्टफोन नहीं है। समूह में अगर एक स्मार्टफोन भी है तब भी समूह के सारे लोग रजिस्टर हो सकते हैं। यह एक बहुत ही सुगम और सरल है।

सहायता एप की खास बातें

  1. एप को ‘कोविड 19 हेल्प डॉट झारखंड डॉट जीओवी डॉट इन’ वेबसाइट पर जाकर डाउनलोड किया जा सकता है।
  2. एप के माध्यम से आवेदन के दौरान कुछ तथ्यों की पुष्टि की जाएगी। जैसे आवेदक का जियो-लोकेशन राज्य से बाहर का होना चाहिए।
  3. आवेदक का नाम उसके आधार डाटा में अंकित नाम से मेल खाना चाहिए।
  4. आवेदक द्वारा दिया गया बैंक विवरण झारखंड राज्य का ही होना चाहिए।
  5. इसके अलावा आवेदक के द्वारा निम्न आंकड़ों की प्रविष्टि की जाएगी। आवेदक का गृह जिला, प्रखंड, पंचायत। आवेदक का नाम, पिता का नाम, आधार संख्या, बैंक का विवरण और वर्तमान राज्य एवं जिला जहां वे फंसे हैं। मोबाइल नंबर।
  6. आधार के आंकड़ों से और मोबाइल नंबर का ओटीपी के द्वारा पहचान का सत्यापन किया जाएगा। आवेदक को अपने आधार कार्ड की तस्वीर एवं सेल्फी को भी अपलोड करना होगा, जिसका वेरिफिकेशन भुगतान से पहले संबंधित गृह जिले द्वारा किया जाएगा। आवेदक को सहायता भुगतान के संबंध में एसएमएस के द्वारा सूचना दी जाएगी।

मुख्यमंत्री बोले, एक सप्ताह के भीतर सहायता राशि उपलब्ध कराना सरकार का लक्ष्य

झारखंड केमुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने राज्य के बाहर लॉकडाउन के कारण फंसे श्रमिकों की सहायता हेतु मोबाइल एप लांच किया। इस एप को covid19help.jharkhand.gov.in से डाउनलोड किया जा सकता है। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने गुरुवार को राज्य के प्रवासी मजदूरों को आर्थिक सहायता पहुंचाने के लिए झारखंड मुख्यमंत्री विशेष सहायता योजना मोबाइल एप लांच किया। इस मोबाइल एप से प्रवासी मजदूरों का डेटाबेस तैयार करने में मदद मिलेगी। लॉकडाउन की अवधि में प्रवासी मजदूरों को राज्य सरकार के द्वारा 2000 रुपये तक आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। सीएम ने इसे मोबाइल ऐप के जरिये प्रवासी मजदूर भाईयों तक पहुंचने का प्रयास बताते हुए कहा कि एक सप्ताह के अंदर सभी श्रमिकों को सहायता राशि उपलब्ध कराना हमारा लक्ष्य है।  

  मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि आने वाले एक सप्ताह के अंदर राज्य के वैसे मजदूर जो देश के विभिन्न राज्यों में फंसे हैं उन्हें चिन्हित कर झारखंड सरकार आर्थिक सहायता राशि उपलब्ध कराएगी। यह राशि प्रवासी मजदूरों को सीधे उनके बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से ट्रांसफर किया जाएगा। यह राशि कम से कम एक हजार रुपए होगी।मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड विशेष सहायता योजना मोबाइल ऐप से प्रवासी मजदूर भाईयों तक पहुंचने का प्रयास राज्य सरकार द्वारा किया गया है। इस ऐप के माध्यम से प्रवासी मजदूर भाइयों को आर्थिक सहायता पहुंचायी जाएगी। उक्त बातें मुख्यमंत्री ने आज झारखंड मंत्रालय में आयोजित झारखंड विशेष सहायता योजना मोबाइल ऐप के उद्घाटन अवसर पर कही।  

मोबाइल एप से प्रवासी मजदूरों का डेटाबेस तैयार करने में भी मिलेगी मदद

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि इस ऐप के माध्यम से आने वाले सप्ताह दिन के अंदर राज्य के प्रवासी मजदूरों तक आर्थिक सहायता राशि पहुंचाया जाए। उन्होंने कहा कि वैसे तो झारखंड सरकार कोरोना वायरस (कोविड-19) के शुरुआती दिनों से ही अपने सीमित संसाधनों के साथ विभिन्न चरणों में एहतिहाती तैयारी एवं बचाव कार्य पर प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। लॉकडाउन के प्रथम चरण में भी अधिकारियों की टीम द्वारा राज्य के बाहर फंसे झारखंड के मजदूरों को सूखा राशन इत्यादि उपलब्ध कराने के लिए दूसरे राज्यों से लगातार समन्वय बनाया गया है। अधिकारियों की टीम द्वारा अधिक से अधिक लोगों को कैसे मदद किया जाए इस पर निरंतर कार्य किया जा रहा है। 

मजदूर, आदिवासी, दलित एवं गरीबों के प्रति पूरी संवेदना

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना वायरस (कोविड-19) संक्रमण की इस घड़ी में वर्तमान सरकार झारखंड के मजदूर, आदिवासी, दलित, गरीब, असहाय लोगों के प्रति अपनी पूरी संवेदना रखी है। इस संकट की घड़ी में सबसे ज्यादा दिक्कत मजदूर तबके एवं गरीब लोगों को ही है। सरकार को इन गरीबों की सबसे अधिक चिंता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में रोजगार के अभाव के कारण यहां के लोग दूसरे राज्यों में रोजगार के लिए पलायन कर जाते हैं, अचानक लॉकडाउन होने के कारण मजदूर जहां थे वहीं फंसे रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि लॉकडाउन का समयावधि बढ़ाया गया है जिसके कारण परेशानियां और बढ़ी हैं। राज्य सरकार का पूरा तंत्र प्रयासरत है कि इस विपदा की घड़ी में कैसे लोगों को अधिक से अधिक सहायता मिल सके। 

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि इस समय पूरे देश का हालात गंभीर है।  वैसे परिवार के लोग जो रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में जाकर फंसे पड़े हैं उन्हें अपने परिवार की चिंता और परिवार को रोजगार के लिए गए उस व्यक्ति की चिंता सता रही है। इस दयनीय स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ऐसे गरीब परिवारों को जिला, प्रखंड एवं पंचायत स्तर पर सामुदायिक किचन के माध्यम से प्रतिदिन नि:शुल्क गर्म खाने की व्यवस्था की है। राज्य सरकार सभी वर्ग के लोगों को प्राथमिकता के साथ खाद्यान्न भी उपलब्ध करा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस आपदा की घड़ी में विभिन्न सामाजिक संगठन के लोगों ने भी गरीबों, असहाय और रोज कमाने खाने वाले लोगों को भोजन कराने और सूखा राशन बांटने का बीड़ा उठा रखा है। ऐसी सभी सामाजिक संस्थाएं जो समाज सेवा में लगे हैं वह प्रशंसा के पात्र हैं। मैं उन्हें दिल से धन्यवाद देता हूं। जो लोग गरीबों की सेवा में लगे हैं ईश्वर उनकी रक्षा करें ऐसी मैं प्रार्थना करता हूं।

मोबाइल एप मील का पत्थर साबित होगा

मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि यह मोबाइल ऐप प्रवासी मजदूरों के सहायतार्थ मील का पत्थर साबित होगा। लॉकडाउन 2 के समय देश के विभिन्न राज्यों में फंसे मजदूर एवं अन्य राज्य वासी की सहायता के लिए विशेष तौर पर अधिकारियों की टीम द्वारा यह मोबाइल ऐप बनाया गया है। उन्होंने कहा कि इस मोबाइल एप का उपयोग वैसे मजदूर भी कर सकेंगे जिनके पास स्मार्टफोन नहीं है। सिर्फ समूह में अगर एक स्मार्टफोन भी है तब भी समूह के सारे लोग रजिस्टर हो सकते हैं। यह एक बहुत ही सुगम और सरल है। 

इस अवसर पर योजना सह वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव, श्रम नियोजन एवं प्रशिक्षण मंत्री सत्यानंद भोक्ता, अनुसूचित जनजाति अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री चंपाई सोरेन, स्वास्थ्य चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण मंत्री बन्ना गुप्ता, मुख्य सचिव सुखदेव सिंह, अपर मुख्य सचिव अरुण कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव राजीव अरुण एक्का, प्रधान सचिव एपी सिंह, सचिव विनय चौबे, सचिव सुनील कुमार सिंह,  मुख्यमंत्री के प्रेस सलाहकार अभिषेक प्रसाद मुख्यमंत्री के वरीय आप सचिव सुनील श्रीवास्तव सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।

झारखंड मुख्यमंत्री विशेष सहायता योजना मोबाइल ऐप से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण बातें 

इस ऐप को https://covid19help .jharkhand.gov.in से डाउनलोड किया जा सकता है

उक्त ऐप के माध्यम से आवेदन के दौरान निम्न तथ्यों की पुष्टि की जाती है।

  1. आवेदक का जियो-लोकेशन राज्य से बाहर का होना चाहिए।
  2. आवेदक का नाम उसके आधार डाटा में अंकित नाम से मेल खाना चाहिए
  3. आवेदक द्वारा दिया गया बैंक विवरण झारखंड राज्य का ही होना चाहिए

आवेदक के द्वारा निम्न आंकड़ों की प्रविष्टि की जाती है।

  1. आवेदक का गृह जिला, प्रखंड, पंचायत।
  2. आवेदक का नाम, पिता का नाम, आधार संख्या, बैंक का विवरण।
  3. वर्तमान राज्य एवं जिला जहां फंसे हैं
  4. मोबाइल संख्या।

ऐसे होगा श्रमिकों का सत्‍यापान

  1. आधार संख्या का आधार के आंकड़ों से एवं मोबाइल संख्या का ओटीपी के द्वारा सत्यापन किया जाता है।
  2. आवेदक को अपना आधार कार्ड का तस्वीर एवं सेल्फी को भी अपलोड करना होगा, जिसका वेरिफिकेशन भुगतान से पहले संबंधित गृह जिले के द्वारा किया जाएगा।
  3. आवेदक को सहायता भुगतान के संबंध में एसएमएस के द्वारा सूचना दी जाएगी।
  4. सफलतापूर्वक पंजीकृत आंकड़े पोर्टल https://covid19help.jharkhand.gov.in पर संग्रहित होंगे।
  5. इस पोर्टल पर आंकड़ों का वेरिफिकेशन, PFMS के माध्यम से भुगतान, MIS एवं डैशबोर्ड संबंधित कार्य संपादित किए जाएंगे।

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