Home देश दूसरे राज्यों में फंसे 17 लाख बिहारियों को लाना संभव नहीं, वहीं रख रहे उनका ख्याल: नीतीश सरकार

दूसरे राज्यों में फंसे 17 लाख बिहारियों को लाना संभव नहीं, वहीं रख रहे उनका ख्याल: नीतीश सरकार

9 second read
0
0
286

पटना. बिहार सरकार ने पटना हाईकोर्ट से कहा कि लॉकडाउन के चलते बिहार के 17 लाख से ज्यादा लोग दूसरे राज्यों में फंसे हैं। लॉकडाउन के चलते इनको बिहार नहीं लाया जा सकता है। फौरी सहायता के तौर पर इनको भोजन, राशन, रुपया दिया जा रहा है। आपदा प्रबंधक विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत ने लॉकडाउन में दूसरे राज्यों में फंसे बिहार के लोगों तथा राज्य सरकार द्वारा उनकी की जा रही मदद के बारे में गुरुवार को हाईकोर्ट के निबंधक कार्यालय को स्टेटस रिपोर्ट सौंपी। इसमें इन बातों की विस्तार से चर्चा है।

हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजय करोल ने इस मसले पर सरकार से जवाब मांगा था। सरकार की रिपोर्ट के अनुसार, लॉकडाउन का कानून व केंद्र सरकार की गाइडलाइन का सख्त अनुपालन राज्य सरकार कर रही है। लॉकडाउन की अवधि में यहां के किसी भी व्यक्ति को नहीं लाया जा सकता है। ऐसे लोगों को समुचित भोजन, राशन के साथ तत्काल 1-1 हजार रुपए दिए जा रहे हैं। दूसरी तमाम तरह की समस्याओं को दूर करने की हरसंभव कोशिश जारी है। टेलीफोन, हेल्पलाइन नम्बर,  मोबाइल एप बहुत पहले से जारी है। 

उत्तर प्रदेश से साइकिल से 600 किमी दूर अपने घर अररिया चल पड़े 35 मजदूर

उत्तर प्रदेश में कालीन उद्योग के लिए प्रसिद्ध भदोही में बिहार के काफी मजदूर लॉकडाउन के कारण मुसीबत में फंसे हुए हैं। जगह-जगह बिहार- उत्तर प्रदेश की सीमाएं सील हैं। इसलिए अररिया के 37 मजदूराें काे जब काेई चारा नहीं दिखा ताे वे 21 अप्रैल को 600 किमी दूर घर लौटने के लिए साइकिल का सहारा लिया। 23 अप्रैल को ये भोजपुर से आगे बढ़ते देखे गए।

अब तक यह सब किया

  • कोटा के डीएम ने बिहारी छात्रों को घर जाने के लिए पास निर्गत किया था। बिहार ने केंद्र व राजस्थान के समक्ष सख्त आपत्ति दर्ज की।
  • बिहार सरकार कोटा के डीएम, राजस्थान सरकार तथा उन तमाम राज्य सरकारों के साथ लगातार संपर्क में है, जहां बिहार के लोग फंसे हैं। सबकी सुध ली जा रही है। 
  • आ रही शिकायती कॉल के आधार पर क्षेत्रवार क्लस्टर तैयार किया गया है। देश भर के  करीब 160 जिलों में  ऐसे 3217 क्लस्टर्स अब तक चिन्हित किए जा चुके हैं।
  • ऐसे लोगों के खाते में तत्काल हजार-हजार रुपये दिए जा रहे हैं। 
  • बिहार फाउंडेशन, महाराष्ट्र-दिल्ली व अन्य राज्यों में ऐसे लोगों को खाना खिला रहा है। 21 अप्रैल तक 6,81,225 भोजन पैकेट बांटे गए।

कोटा में पढ़ रहे बिहार के बच्चाें को घर लाने के मामले में कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

हाईकोर्ट ने कोटा में पढ़ रहे बिहार के विद्यार्थियों को वापस लाने के मामले में राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। न्यायमूर्ति हेमंत कुमार श्रीवास्तव व न्यायमूर्ति आर.के.मिश्रा की खंडपीठ ने गुरुवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। एक छात्रा के पिता पवन कुमार की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि छात्रा को कोटा में रहने, खाने तक की परेशानी है। जिस प्रकार उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, पश्चिम बंगाल, असम की राज्य सरकारें कोटा में पढ़ने वाले अपने यहां के बच्चों को ले गई, उसी तरह बिहार सरकार भी अपने बच्चाें काे घर लाए। कोर्ट को बताया गया कि विधायक अनिल सिंह कोटा जाकर अपनी बेटी को ले आए। लेकिन, घर आने के लिए याचिकाकर्ता की पुत्री ने वाहन पास के लिए पटना डीएम के यहां आवेदन दिया है जाे 15 अप्रैल से लंबित है। राज्य सरकार के अपर महाधिवक्ता अंजनी कुमार ने कोर्ट को बताया कि भारत सरकार ने किसी भी व्यक्ति को देश के भीतर एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने पर प्रतिबंध लगा रखा है। इस मामले में अगली सुनवाई 27 अप्रैल को होगी।

छात्रों के लिए हेल्पलाइन नंबर

बिहार के बाहर फंसे हुए छात्रों के लिए सरकार ने हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। हेल्पलाइन का नंबर 0612- 2294600 है। लॉकडाउन में फंसे हुए छात्र इस नंबर पर फोन करके अपनी समस्याओं की जानकारी दे सकते हैं। 

Load More By Bihar Desk
Load More In देश

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Check Also

तेज प्रताप और ऐश्वर्या राय की आज मुलाकात, तलाक की बात पर होगी चर्चा ! पढ़ें

ऐश्वर्या राय के तलाक के मुकदमे में आज अहम सुनवाई का दिन है। आज दोनों के बीच मुलाकात होगी। …