Home बड़ी खबर बिहार लौटे मजदूरों ने सुनाई पीड़ा- राजस्‍थान सरकार दिन में एक बार देती थी छोट-छोट पूरी, रात गुजरती थी पानी पर

बिहार लौटे मजदूरों ने सुनाई पीड़ा- राजस्‍थान सरकार दिन में एक बार देती थी छोट-छोट पूरी, रात गुजरती थी पानी पर

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पटना । ‘हे हो…अब अपने घर में मकई के रोटी खईबई, परदेस रोजगार खोजे नई जईबई…गांव में जे व्यवस्था छई ओही में रहबई और मजदूरी करके बाल-बच्चा पाल लेबई…बड़ शोषण छई बाहर में…खाना के नाम पर सात ठो छोट-छोट पूरी और आलू के सुखल सब्जी देले रहई राजस्थान सरकार के लोग…एके शाम के भोजन में दुनो शाम खाय के रहई…अपन खाना तो बच्चा सबके दे देत रहिअई… अपन देश आ गेलीयई हे..अब हिअईं जीवई या मरबई…।’ जब दानापुर स्टेशन पर शनिवार दोपहर जयपुर से श्रमिक स्पेशल ट्रेन पहुंची तो उतरे दो मजदूरों की यह प्रतिक्रिया थी। अन्य प्रवासी श्रमिक भी यही बातें कर रहे थे। 

राजस्‍थान के जयपुर शहर से दूर मकराना में मार्बल फैक्ट्री में काम करने वाले सहरसा निवासी मनोज कुमार पत्नी व बेटे के साथ लॉकडाउन में फंसे थे। दानापुर स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या 5 पर ट्रेन से उतरने के बाद स्क्रीनिंग के दौरान रेलवे स्कूल जाने के क्रम में हुई बातचीत में कहा कि 25 मार्च को ठेकेदार के मुंशी ने काम देने से मना कर दिया। 26 को दूसरी फैक्ट्री में काम ढूंढ़ता रहा। काम नहीं मिला। दो-तीन दिन रहने के बाद वह पैदल ही और लोगों के साथ मकराना से जयपुर आ गया। वहां से सहरसा लौटने की जुगाड़ कर रहा था। दो दिन तक कुछ भी खाने को नहीं मिला। इधर-उधर भटकते रहने के बाद किसी ने खाना दे दिया तो पत्नी व बच्चों को खिला दिया। 2 अप्रैल से वह शिविर में आ गया। वहां दोपहर में ही भोजन मिलता था। एक और बच्चे के नाम पर अधिक भोजन ले लेते थे जिसे रात में बच्चे को खिला देते थे। खुद पानी पीकर सोते थे। 

 नागौर जिले के आसपास नमक व पाउडर फैक्ट्री में काम करने वाले बगहा जिले के चंद्रभान कुशवाहा, रामधनी राम, मनोज सहनी, सुरेश चौधरी, वीरेंद्र कुमार, मोतिहारी निवासी रामबहादुर राय, जगन्नाथ पासवान, अनिल कुमार, विजय कुमार मधेपुरा निवासी राजेश चौधरी, धीरेंद्र, ङ्क्षमटू, रतीश एवं सोहन ने आपबीती सुनाते कहा कि दूसरे शहर जाकर मजदूरी करने से तौबा करते हैं। अपने घर की सूखी रोटी मंजूर है, दोबारा नहीं जाएंगे। जयपुर में ट्रेन में सवार होने के दौरान उन्हें लंच का पैकेट दिया गया था। दूसरे दिन ट्रेन के डीडीयू पहुंचने पर नाश्ते का पैकेट मिला। पटना आ गए हैं तो सरकार भोजन करा रही। 

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