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आजादी तो देखी, नहीं देख सके बिजली

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जमुई। केन्द्र और राज्य सरकार सूबे के सभी गांवों और टोलों में बिजली पहुंचाने का दावा करती है, लेकिन प्रखंड के पोझा पंचायत के आधा दर्जन आदिवासी बहुल गांव बिजली की लौ नहीं देख पाए। यहां के लोग अभी भी बल्ब की रोशनी देखने के लिए तरस रहे हैं।

चकाई प्रखंड मुख्यालय से 15 किमी की दूरी पर स्थित पोझा पंचायत का गोबरदाहा, शुकुलबथान, मातकोम बेढा, खैरबढढा, शीशा कोचा, छातवाटांड़, देवपहाड़, रंगनिया, धवाकुरा, हल्दीतरी, पंचकठिया, ओडरा, उखिरया गांव में आजादी के 73 साल बाद भी बिजली नहीं पहुंच पाई है। यहां के लोग आज भी ढिबरी और लालटेन युग में जीने को विवश हैं। इन गांवों के 230 से अधिक परिवारों की लगभग तीन हजार की आबादी आज भी बिजली की रोशनी के लिए तरस रही है। ग्रामीण बताते हैं कि बिजली के बिना उन लोगों का जीवन अधूरा है। डीलर से मिले एक लीटर केरोसिन से वे लोग किसी तरह एक माह तक ढिबरी जलाते हैं। केरोसिन खत्म होने पर अंधेरे में रात गुजारना पड़ता है। ग्रामीण बताते हैं कि बिजली के लिए फरियाद लगाते-लगाते थक चुके हैं पर बिजली नसीब नहीं हुई। अब तो उन लोगों को ढिबरी के साथ रात गुजारने की आदत सी पड़ गई है।

जनता की आवाज़

हम लोग गरीब मजदूर हैं। बड़े अधिकारियों से बात नहीं कर पाते। यही कारण है कि कोई हमारी बात नहीं सुनता और हम चुपचाप अंधेरे में रहने को मजबूर हैं। बिजली रहती तो सुविधा रहती और बच्चों को पढ़ने-लिखने में आराम होता।

– छोटेलाल मुर्मू

सरकार हर क्षेत्र में काम कर रही है और हर गांव में बिजली देने की बात करती है तो फिर मेरे गांव में बिजली नहीं पहुंच सकी। आज भी हम लोग बिजली का खंभा और तार देखने के लिए तरस रहे हैं। रोशनी तो दूर की बात है।

– बड़की सोरेन

गांव-गांव तक बिजली पहुंच गई लेकिन हम लोग बिजली नहीं देख सके। अब तो 60 साल उम्र हो गई। सरकार और प्रशासन इतना तो ध्यान दे की कम से कम आने वाली पीढ़ी इससे वंचित नहीं रहे।

– चुन्नु मुर्मू

पूरे प्रखड में बिजली पहुंच गई, लेकिन हम लोगों के गांव में बिजली नहीं है। अंधेरे में काफी परेशानी होती है। बिजली के बिना बच्चे पढ़ नहीं पाते। घर में बिजली चालित कोई सुविधा का लाभ हम लोगों को नहीं मिल पाता है। मोबाइल भी बाजार से चार्ज करवाना पड़ता है।

– संजय हेम्ब्रम

जनप्रतिनिधियों और विद्युत विभाग की उपेक्षा के कारण हमारे गांव में बिजली नहीं पहुंची है। देश में प्रधानमंत्री विद्युतीकरण योजना चल रही है तो मेरे गांव को बिजली से क्यों उपेक्षित रखा गया।

– रौशन मुर्मू

आजादी के बाद बिजली नहीं रहना काफी दुखद है। सरकार का गांव-गांव में बिजली पहुंचाने का दावा पोझा पंचायत में पूरी तरह खोखला है। यहां की एक बड़ी आबादी इस आवश्यक सुविधा से वंचित है जो काफी दुखद है। सरकार जल्द इन गांवों में बिजली पहुंचाए नहीं तो ग्रामीणों के साथ आंदोलन करेंगे।

– रामलखन मुर्मू, जिला पार्षद

मेरी जानकारी में तो जिले के सभी गांवों में बिजली पहुंच गई है। इन गांवों में बिजली क्यों नहीं पहुंची, यह जांच का विषय है। जानकारी मिली है तो जांच करवाकर इन गांवों में बिजली पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।

– संजय कु शर्मा, कार्यपालक अभियता, विद्युत विभाग, जमुई।

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