Home बड़ी खबर श्रमिक स्पेशल ट्रेन से आने वाले मजदूरों को ना हो कोई समस्या – नीतीश कुमार

श्रमिक स्पेशल ट्रेन से आने वाले मजदूरों को ना हो कोई समस्या – नीतीश कुमार

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 पटना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि लॉकडाउन में दूसरे राज्यों में फंसे जो लोग बिहार आये हैं या अभी आने वाले हैं, उन्हें कोई समस्या न हो। इसका पूरा ध्यान रखें। सभी राज्यों के साथ आवश्यक समन्वय बनाएं, ताकि बिहार आने वाले इच्छुक  लोगों को कोई परेशानी नहीं हो। 

उन्होंने कहा कि बिहार आने के इच्छुक लोगों के जो फोन आ रहे हैं, उनकी रिसीविंग को लेकर आपदा प्रबंधन विभाग के कंट्रोल रूम में समुचित व्यवस्था हो। मुख्यमंत्री  शनिवार को मुख्य सचिव एवं अन्य वरीय अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर रहे थे। उन्होंने इस दौरान कई निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया है कि प्रखंड स्तरीय क्वारंटाइन केन्द्रों पर पहुंचे लोगों के भोजन, आवासन एवं चिकित्सकीय सुविधा की पूरी व्यवस्था का ध्यान रखें। उसकी मॉनिटरिंग भी सुनिश्चित करें।

क्वारंटाइन अवधि के बाद  ग्रामीण क्षेत्रों में गाइडलाइन के अनुरूप अतिरिक्त रोजगार सृजन की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाय। बाहर से आये श्रमिकों का स्किल सर्वे कराकर उनके स्किल के आधार पर रोजगार उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाय, ताकि उनकी क्षमता का बेहतर उपयोग हो सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना संक्रमण से बचने का सबसे प्रभावी उपाय सोशल डिस्टेंसिंग है। उन्होंने लोगों से अपील की कि लॉकडाउन का पालन करें, घर में रहें और सुरक्षित रहें।  

शनिवार को घर पहुंचे 1174 प्रवासी
राज्य के प्रवासी मजदूरों को लेकर पहली श्रमिक स्पेशल ट्रेन शनिवार दोपहर दो बजे दानापुर जंक्शन पहुंची थी। ट्रेन से उतरे 1174 प्रवासियों के चेहरे पर घर लौटने की खुशी दिखी। दानापुर पहुंचने के बाद सभी की स्क्रीनिंग की गई। इसके बाद अलग-अलग बसों से उन्हें उनके प्रखंड मुख्यालय में बने क्वारंटाइन सेंटर में भेज दिया गया। वहां वे 21 दिनों तक रहेंगे। इसके बाद ही अपने परिवार से मिल पाएंगे।  शनिवार दोपहर दो बजे दानापुर जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर पांच पर ट्रेन पहुंचते ही सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें घेर लिया। सुरक्षा घेरे के बीच सभी प्रवासियों को दानापुर हाईस्कूल में बने आपदा राहत केंद्र लाया गया। वहां सभी का चिकित्सकीय परीक्षण किया गया। पहले चरण में सबके तापमान की जांच की गई। इसके बाद लक्षण और ट्रेवल हिस्ट्री के आधार पर उनकी स्क्रीनिंग की गई। 

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