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मनरेगा की मदद से 36 करोड़ मानव कार्य दिवस के रोडमैप के लिए सरकार तैयार:झारखंड

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मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड सरकार लॉकडाउन में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए एक महत्वाकांक्षी मार्ग अपनाने के लिए पूरी तरह से तैयार है। तीन योजनाओं की मदद से राज्य सरकार विभिन्न राज्यों से लौट रहे पांच से छह लाख प्रवासी श्रमिकों को रोजगार मुहैया कराने का प्रयास करेगी। हेमंत सरकार का मानना है कि राज्य की पिछली भाजपा सरकार ने मनरेगा पर बहुत कम ध्यान दिया जबकि यह योजना ग्रामीण क्षेत्र में दैनिक मजदूरों की आजीविका को बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में तरलता लाने का सबसे बड़ा माध्यम हो सकती है। सरकार ने मनरेगा के माध्यम से 36 करोड़ मानव कार्य दिवस उत्पन्न करने का रोडमैप तैयार किया है। राज्य सरकार का कहना है कि वह अपने नागरिकों, विशेष रूप से कमजोर एसटी, एससी समुदायों, ग्रामीण क्षेत्रों में महिला कर्मचारियों और आर्थिक रूप से पिछड़े कमजोर परिवारों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।

झारखंड में बेरोजगारी दर देश से दोगुनी अधिक
सीआईएमई डेटा के अनुसार झारखंड में बेरोजगारी दर देश की बेरोजगारी दर से लगभग दोगुनी है। राज्य की बेरोजगारी दर (47.1%) है जबकि भारत की (24.1%) है।
पिछले वित्त वर्ष, 2019-20 में मनरेगा के माध्यम से 6.42 करोड़ मानव कार्य दिवस उत्पन्न किया गया। इसमें 13.85 लाख परिवारों ने काम किया। 2018-19 में  5.36 करोड़ मानव कार्य दिवस में 12.73 लाख परिवारों को काम मिला।  
चालू वित्त वर्ष में, झारखंड में 49.46 लाख ग्रामीण परिवारों के पास मनरेगा जॉब कार्ड है और 22.45 लाख परिवारों के पास सक्रिय जॉब कार्ड हैं।
लॉक डाउन में भारत सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा के कामों की अनुमति दी है, लेकिन अब तक केवल 1.37 लाख घरों को काम मिला है और 1.59 लाख श्रमिक काम कर रहे हैं।

इन योजनाओं की पटरी पर रोजगार की रेल
1. बिरसा हरित ग्राम योजना
वनों की कटाई के लिए दो लाख एकड़ से अधिक उपयोग नहीं की जा रही सरकार परती भूमि का उपयोग किया जाएगा।  पांच लाख परिवारों को लगभग 100-100 फलदार पौधों का पट्टा दिया जाएगा। प्रारंभिक वृक्षारोपण, रखरखाव और भूमि कार्य, वनीकरण मनरेगा के माध्यम से किया जाएगा।
अगले कुछ महीनों में पांच करोड़ से अधिक फल देने वाले पौधे लगाए जाएंगे।
अगले पांच वर्षों पौधों को सुरक्षित रखने के लिए परिवारों को सहायता
स्थानीय और राज्य स्तर के बाजारों में फलों के उत्पादन को बेचने के लिए सुगम व्यवस्था के तहत चेन तैयार किया जाएगा
प्रत्येक परिवार को हर साल 50 हजार रुपये की वार्षिक आय प्राप्त होने का अनुमान है।
जिला और प्रखंड स्तर पर प्रसंस्करण ईकाई स्थापति की जाएंगी
भूमि का स्वामित्व राज्य सरकार के पास रहेगा
अगले पांच वर्षों में लगभग मनरेगा के तहत 25 करोड़ मानव दिवस की अपेक्षा की है।
                                        
2. नीलाम्बर पीताम्बर जल-समृद्धि योजना : हर साल पांच लाख करोड़ लीटर वर्षा जल का भंडारण
जल संरक्षण, भूजल रिचार्ज, एग्रो वाटर स्टोरेज इकाइयों के निर्माण और वर्षा जल संचित करने के लिए एक विशेष योजना।
खेतों का पानी खेतों में रोकने का लक्ष्य
पांच लाख एकड़ बंजर भूमि का संवर्द्धन
अगले 4-5 वर्षों में इस योजना के तहत कार्यों के माध्यम से अनुमानित 10 करोड़ मानव दिवस उत्पन्न किए जाएंगे।
सीमांत भूमि धारक और किसान हर साल पांच लाख करोड़ लीटर वर्षा जल का भंडारण कर सकेंगे।
यह योजना मुख्य रूप से पलामू प्रमंडल में केंद्रित होगी। जिसमें अधिकतम सूखा, अल्प वर्षा, सिंचाई के उचित साधनों की कमी, भूजल रिचार्ज में कमी रहती है। राज्य सरकार की प्रतिबद्धता है कि राज्य भर में कृषि और कृषि कार्य आश्रित परिवारों के लिए सुनिश्चित किया जा सके। मुख्य रूप से पलामू क्षेत्र में पानी, सिंचाई के क्षेत्र में कोई दिक्कत नहीं होगी।

3. पोटो हो खेल विकास योजना : पांच हजार खेल के मैदान बनेंगे
झारखंड हॉकी, तीरंदाजी और फुटबॉल के खिलाड़ियों का पालना स्थल रहा है। यहां की महिलायें और लड़कियां, विशेष रूप से गरीबी और संरचनात्मक चुनौतियों के बावजूद सराहनीय प्रदर्शन करती हैं। कई अवसरों पर राज्य और देश को गौरवान्वित भी करती आ रही हैं। मुख्यमंत्री ने झारखंड को एक स्पोर्टिंग पावरहाउस के रूप में विकसित करने और दूरदराज के गांवों में छोटे बच्चों की क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया है। मुख्य ( खेल ) मंत्री ने मनरेगा के साथ इस विशेष जमीनी स्तर की खेल योजना की परिकल्पना की है।

प्रत्येक 4562 पंचायतों में कम से कम एक और पूरे झारखंड में 5000 खेल मैदान विकसित किए जाएंगे। यह कार्य मनरेगा के माध्यम से किया जाएगा और इस वित्त वर्ष में अनुमानित एक करोड़ मानव दिवस का सृजन किया जाएगा।

युवा प्रतिभाओं की पहचान करने, प्राथमिक खेल प्रशिक्षण प्रदान करने और सभी आवश्यक खेल उपकरणों के उपयोग को उपलब्ध कराने के लिए राज्य भर में ब्लॉक और जिला स्तर पर खेल विकास और प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किया जाएगा। ये केंद्र मौजूदा और भविष्य की राज्य स्तरीय अकादमियों के फीडर केंद्र के रूप में कार्य करेंगे।

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