Home बड़ी खबर सूबे के बाहर से उत्तर बिहार पहुंचने लगे प्रवासी मजदूर और छात्र, मंगलवार की सुबह दो ट्रेनें पहुंचीं

सूबे के बाहर से उत्तर बिहार पहुंचने लगे प्रवासी मजदूर और छात्र, मंगलवार की सुबह दो ट्रेनें पहुंचीं

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मुजफ्फरपुर। गृह मंत्रालय की ओर से गाइडलाइंस जारी होने के बाद प्रवासी मजदूरों और छात्रों के पहुंचने का क्रम जारी है। इसी क्रम में मंगलवार को दो ट्रेनें क्रमश: मुजफ्फरपुर और दरभंगा पहुंचीं। गुजरात के साबरमती से श्रमिकों को लेकर एक विशेष गाड़ी सुबह पांच बजे मुजफ्फरपुर पहुंची। वहीं दूसरी ओर, कोटा से छात्रों को लेकर एक विशेष ट्रेन दो घंटे की देरी से सुबह आठ बजे दरभंगा पहुंची।

कोटा से दरभंगा पहुंची पहली स्पेशल ट्रेन में 24 बोगियां थीं। इससे एक-एक कर स्टूडेंट को उतारा गया। कोटा से लौटे दरभंगा के सभी छात्रों को एमएलएसएम कॉलेज ले जाया गया। इसके बाद उन्हें संबंधित प्रखंडों में भेजा गया। वहीं मधुबनी जिले के सभी स्टूडेंट्स को जंक्शन परिसर स्थित पंडालों में बैठाया गया है।

दरभंगा पहुंचने से पहले यह स्पेशल ट्रेन इंजन बदलने के लिए कुछ देर तक समस्तीपुर भी रुकी। करीब आधे घंटे बाद ट्रेन संख्या 09823 दरभंगा के लिए रवाना हो गई। ट्रेन के यहां पहुंचते ही आरपीएफ और जिला पुलिस टीम ने अपनी चौकसी बढ़ा दी। इस बात का विशेष ध्यान रखा गया कि कोई छात्र यहां उतरने न पाए।

इससे पहले मंगलवार की सुबह गुजरात के साबरमती से 1200 यात्रियों को श्रमिक स्पेशल मुजफ्फरपुर पहुंची। इसमें राज्य के अन्य जिलों के प्रवासी मजदूर भी थे। ट्रेन के आने से पहले ही सुरक्षा की सख्त व्यवस्था की गई थी। आरपीएफ और जिला पुलिस बल के जवानों को यहां तैनात किया गया था। जिससे किसी तरह की परेशानी न हो। शारीरिक दूरी को बनाए रखने के लिए पूर्व से ही गोला बना दिया गया था।

मंगलवार की सुबह करीब पांच गुजरात के साबरमती से श्रमिक स्पेशल ट्रेन मुजफ्फरपुर जंक्शन के प्लेटफार्म संख्या एक पर पहुंची। ट्रेन के आने की पूर्व सूचना होने के कारण रेलवे और जिला प्रशासन की आेर से सुरक्षा और जांच की पुख्ता व्यवस्था की गई थी। पांच बजे जैसे ही ट्रेन यहां पहुंची सभी बोगी के लिए निर्धारित काउंटर पर यात्रियों को बुलाया गया। वहां स्क्रीनिंग के साथ उनका पंजीयन किया गया। 

गुजरात से यहां पहुंचे यात्रियों ने बताया कि उन्हें 730 रुपये का भुगतान करना पड़ा। जिसमें 715 रुपये रेलवे टिकट के लिए और 15 रुपये बतौर बस किराया देना पड़ा। यात्रियों की शिकायत थी कि उन्हें निशुल्क लाने की व्यवस्था किए जाने की बात कही गई थी, लेकिन भुगतान करना पड़ा। हालांकि इस बात के लिए उनके मन में संतोष था कि आखिरकार वे अपने प्रदेश पहुंचने में कामयाब रहे।

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