Home बड़ी खबर कोरोना के खिलाफ जंग के बीच ड्यूटी से गायब मिले 362 डॉक्टर, महामारी कानून के तहत होगी कार्रवाई

कोरोना के खिलाफ जंग के बीच ड्यूटी से गायब मिले 362 डॉक्टर, महामारी कानून के तहत होगी कार्रवाई

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पटना। राज्य में कोरोना के खिलाफ जारी जंग में सरकार के आदेश की अवहेलना कर पटना के 25 समेत कुल 362 डॉक्टर ड्यूटी से गायब पाए गए। जिसके बाद सरकार ने इन सभी के खिलाफ आपदा प्रबंधन और महामारी कानून के तहत कार्रवाई का फैसला लिया है। स्वास्थ्य विभाग ने सभी डॉक्टरों को नोटिस दी है।

राज्य में कोरोना के प्रकोप को देखते हुए सरकार ने डॉक्टर, स्वास्थ्य कर्मियों और पारा मेडिकल स्टाफ के सभी अवकाश 31 मई तक रद कर दिए है। डॉक्टरों से लेकर पारा मेडिक्स तक को कोरोना के खिलाफ जारी अभियान में लगाया गया। इस बीच सरकार ने डॉक्टरों की उपस्थिति की जानकारी हासिल करने के लिए जिलों में औचक निरीक्षण किया। जिसमें यह पाया गया कि 31 मार्च से लेकर 12 अप्रैल के बीच कटिहार छोड़ 37 जिलों में तैनात 362 डॉक्टर अपने कर्तव्य स्थान पर नहीं थे।

जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने इन सभी डॉक्टरों को नोटिस देकर कहा है कि उनके खिलाफ आपदा प्रबंधन एक्ट 2005 और एपिडेमिक डिजीज एक्ट 1897 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। इसके पूर्व डॉक्टर किन कारणों से सेवा में नहीं थे सरकार को इसकी जानकारी दें। 

आइएमए ने कहा, कोरोना मरीज मिलने पर सील ना हों निजी अस्पताल

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के एक प्रतिनिधि मंडल ने मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव से मिलकर कहा कि 60 वर्ष से अधिक आयु के जो डॉक्टर हैं उन्हें कोरोना ड्यूटी से राहत दी जाए। साथ ही यदि प्राइवेट अस्पताल में कोरोना का मरीज मिलता है तो उस अस्पताल को अनिश्चिकाल के लिए सील करने की बजाय उन्हें सरकारी अस्पताल की तरह सैनिटाइज करते हुए पुन: काम की अनुमति दी जाए। स्वास्थ्य के प्रधान सचिव से मिलने गए प्रतिनिधि मंडल का नेतृत्व डॉ. विमल कारक ने किया। मुलाकात के दौरान आइएमए बिहार ने सरकार को आठ सूत्री मांग पत्र सौंपा।

जिसमें सरकार से मांग की गई है कि राज्य सरकार केंद्र सरकार के एपिडेमिक डिजीज अमेंडमेंड एक्ट 2020 के अनुरूप संस्थान एवं व्यक्ति सुरक्षा कानून में संशोधन करे। केंद्र के निर्देश के तहत एक समय में केवल एक तिहाई डॉक्टर, स्वास्थ्य कर्मियों को कोरोना ड्यूटी में लगाया जाए। यदि पति-पत्नी दोनों डॉक्टर हैं तो एक वक्त में किसी एक को ही कार्य में लगाया जाए। आइएमए ने केंद्र सरकार द्वारा दिए गए बीमा का लाभ और प्राइवेट डॉक्टरों को भी अतिरिक्त सुरक्षा देने की मांग भी की है। इसके अलावा सरकारी सेवा में युवा डॉक्टरों की बहाली और मनचाहे स्थान पर उनके पदस्थापन की भी मांग की है। 

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