Home झारखंड रिजल्ट पर विवाद / जेपीएससी-6 के रिजल्ट में एक संशोधन हो चुका…अब दो और की भी तैयारी

रिजल्ट पर विवाद / जेपीएससी-6 के रिजल्ट में एक संशोधन हो चुका…अब दो और की भी तैयारी

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रांची. झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी-6) सिविल सेवा परीक्षा के नतीजे 21 अप्रैल को घोषित किए गए। वहीं कट ऑफ मार्क्स 29 अप्रैल को जारी किया गया। इसके बाद रिजल्ट को लेकर शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। बीसी-वन कैटेगरी में जेपीएससी ने गलती मानते पहले जारी कट ऑफ मार्क्स में बदलाव कर चुका है। इसी प्रकार आरक्षित कैटेगरी के सफल अभ्यर्थियों के सेवा वितरण में मेरिट की अनदेखी का मामला प्रकाश में आ चुका है। इस संबंध में कई अभ्यर्थियों ने जेपीएससी को आवेदन देकर त्रुटियों की ओर ध्यान आकृष्ट कराया है। सेवा वितरण मामले में भी आयोग ने संशोधन की तैयारी शुरू कर दी है। इसके अलावा मुख्य परीक्षा के पेपर-वन हिंदी-अंग्रेजी का अंक मेरिट में जोड़े जाने का भी अभ्यर्थी विरोध कर रहे हैं। इनका कहना है कि छठी सिविल सेवा के सिलेबस के अनुसार हिंदी और अंग्रेजी पेपर क्वालिफाईंग पेपर है। इसलिए इस पेपर का अंक मेरिट में जोड़ा जाना नियम संगत नहीं है। बताते चलें कि शीघ्र जेपीएससी कार्यालय में आयोग की बैठक होगी, जिसमें अभ्यर्थियों द्वारा आकृष्ट कराए गए सभी बिंदुओं की समीक्षा के बाद समुचित निर्णय लिया जाएगा।

जेपीएससी परीक्षा नियंत्रक : मामला संज्ञान में आया है…आयोग की बैठक में निर्णय लिया जाएगा, रिजल्ट में गड़बड़ियों पर जेपीएससी परीक्षा नियंत्रक ज्ञानेंद्र कुमार से सवाल-जवाब

सेवा वितरण में त्रुटि का मामला संज्ञान में आया है। इस पर आयोग की बैठक में निर्णय लिया जाएगा।
पेपर-वन के हिंदी और अंग्रेजी पेपर का प्राप्तांक क्वालिफाइंग रहने के बाद मेरिट लिस्ट में जोड़ा गया है। 5वीं जेपीएससी समेत बीपीएससी और यूपीएससी में भी हिंदी-अंग्रेजी के अंक नहीं जोड़े जाने का प्रावधान है?
5वीं जेपीएससी तक विज्ञापन में उल्लेख था कि हिंदी-अंग्रेजी का अंक जोड़ा नहीं जाएगा। लेकिन छठी जेपीएससी के सिलेबस में बदलाव किया गया है, जिसमें मुख्य परीक्षा का पूर्णांक 1050 अंक है। हिंदी-अंग्रेजी पेपर का अंक नहीं जोड़ना रहता तो मुख्य परीक्षा का पूर्णांक 950 होतास्पोर्ट्स कैटेगरी में मानक के अनुसार योग्य अभ्यर्थी नहीं मिले हैं। इस कारण सभी पद रिक्त रह गए हैं।मुख्य परीक्षा में हिंदी व अंग्रेजी दोनों मिलाकर 100 अंक की परीक्षा हुई थी। इसमें 30 अंक लाने पर ही अन्य विषयों की उत्तर पुस्तिकाएं जांची जानी थी। अभ्यर्थियों ने सिलेबस का हवाला देकर बताया कि जब क्वालिफाईंग पेपर था तो मेरिट लिस्ट में कैसे जोड़ा गया। एसटी, एससी, बीसी-1 और बीसी-2 कैटेगरी के कई अभ्यर्थियों का चयन 600 या इससे अधिक अंक लाने के चलते अनारक्षित (यूएनआर) श्रेणी में हुआ। इसके बाद भी इन्हें उनकी इच्छा का सेवा आवंटन नहीं हुआ। अभ्यर्थियों ने इसे नियम विरुद्ध बताया।जेपीएससी की हर परीक्षा सवालों में घिर जाती है। कभी चयन में पैरवी तो कभी मूल्यांकन में धांधली…। सीबीआई जांच में घिरे जेपीएससी की इस परीक्षा में भी त्रुटियां यही इंगित करती हैं कि राज्य के लिए अफसरों के चयन की जिम्मेदारी के साथ बिठाए गए लोगों की अपनी योग्यता ही सवालों के घेरे में है। जेपीएससी-6 का रिजल्ट जारी होने के बाद से ही लगातार इसमें त्रुटियों के आरोप लग रहे हैं। दबाव बढ़ने पर आयोग ने पहले एक त्रुटि स्वीकार कर ली। अब अभ्यर्थियों का विरोध बढ़ता देख दो और संशोधन की भी तैयारी है। यानी परीक्षा की प्लानिंग और मूल्यांकन का काम निश्चित ही त्रुटिपूर्ण रही है।

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