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कोरोना खतरनाक, पर अन्य बीमारियां ले रहीं अधिक जान

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मधुबनी। विश्वभर में कहर बरपाने वाले कोविड-19 वायरस की चपेट में जिला भी आ चुका है। यहां स्थित 24 संक्रमित मरीज हो गए हैं। मिथिलांचल के जिलों में यह सबसे बड़ी संख्या है। मगर मरीजों पर इसका ऐसा प्रभाव नहीं कि बहुत घबराया जाए। क्योंकि अस्पताल में भर्ती इनमें से किसी में अब तक इस बीमारी के प्रारंभिक लक्षण मसलन: खांसी, कफ, बुखार तक नहीं है। सांस लेने की समस्या तो दूर दूर तक नहीं। इस कारण इन्हें बस आइसोलेट किया गया है। कोई दवा नहीं दी गई है। कुछ मरीज ऐसे हैं जो पहले से दूसरी बीमारियों से पीड़ित हैं। उन्हें उसकी ही दवा दी जा रही है। उन्हें कोरोना की जगह उसी बीमारी का खतरा अधिक बताया जा रहा है।

 झंझारपुर नर्सिंग स्कूल में इलाज कर रहे चिकित्सकों की माने तो मरीजों में 14 दिनों तक अगर लक्षण नहीं आए तो सैंपल की फिर से जांच कराई जाएगी। रिपोर्ट नेगेटिव आने पर छुट्टी दे दी जाएगी। वह कहते हैं कि राहत की बात है कि कोरोना इन्हें अधिक प्रभावित नहीं कर पा रहा। इसका कोई सटीक कारण नहीं बता सकते मगर माना जा रहा है कि ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों का इम्यूनिटी सिस्टम व एंटीबॉडी बेहतर है।

 जिले में कोरोना मामलों को देख रहे डॉक्टर अनिल चक्रवर्ती की माने तो विदेशों या बड़े शहरों के लोग अधिक हाइजेनिक होते हैं। उनका रहन-सहन आदि बेहतर होता है। इस कारण उनमें एंटीबॉडी नहीं बनती। इससे वायरस का प्रभाव उनके शरीर पर अधिक पड़ता है। वहीं, यहां के वातावरण में वायरस व बैक्टीरिया का लगातार प्रभाव रहता है। क्योंकि यह हाइजीन नहीं रहते इससे क्षेत्र के लोगों की एंटीबॉडी बेहतर होती है। यह वायरस वह बैक्टीरिया से लड़ने में सक्षम होती है।

 नारायण सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल कोलकाता के माइक्रोबायोलॉजिस्ट डॉक्टर देवमाल्या बनर्जी भी इससे इत्तेफाक रखते हैं। वे कहते हैं कि तुलना करें तो बिहार के लोगों की लाइफ स्टाइल तो यहां का हाइजीनिक स्तर बेहतर नहीं है। साथ ही संक्रमितों में युवा अधिक है। यह दोनों चीजें कोरोना के प्रभाव को कुछ हद तक कम कर रही है। यहां उन मरीजों को खतरा अधिक है जो दूसरी गंभीर बीमारी से ग्रसित है। अगर उन्हें को रोना का संक्रमण होता है, तो वह खतरनाक होगा। डॉक्टर बनर्जी यह भी कहते हैं कि जैसे-जैसे कोरोना का प्रभाव बढ़ेगा मानव शरीर उसके अनुरूप प्रतिरोधक क्षमता विकसित करेगा। एक या दो माह में इसका प्रभाव काफी कम हो जाएगा।

तब हैजा से खत्म हो गए थे गांव के गांव

जिले के लखनौर प्रखंड की कछुआ निवासी खंजन देवी 90 का कहना है कि करीब 7 दशक पूर्व हैजा का कहर बहुत खतरनाक था। उस समय हैजा से उनकी ससुराल के 13 परिवारों के तकरीबन 80 लोगों की मौत हो गई थी। महामारी से बचने के लिए पति पंडित सीताराम झा के साथ गांव के ही पश्चिम श्रीराम जानकी मंदिर में शरण ली थी। गांव में सैकड़ों लोगों की मौत हो गई थी। आसपास के कई गांव में यही हाल था। उस कहर के सामने यह कुछ भी नहीं। हैजा अब खत्म हो गया, कोरोना भी खत्म हो जाएगा।

अब भी सबसे अधिक मौत का कारण हृदय रोग

सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ डीएस मिश्र की माने तो तेजी से फैलने के कारण ही कोरोना अधिक खतरनाक है। मगर दूसरी कई बीमारियां इससे अधिक जान ले रहीं। अब भी सबसे अधिक मौत का कारण हृदय रोग ही हैं। कैंसर अब तेजी से पांव फैला रहा। डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट की मानें तो भारत में बीमारियों से मौत में हृदय रोग 12.5 फीसद प्रमुख कारण है। वहीं फेफरा संबंधी बीमारी 10 फीसद है। इस साल जनवरी से अब तक का मधुबनी शहरी क्षेत्र का ही आंकड़ा देखें तो नगर परिषद कार्यालय में 188 लोगों की मृत्यु प्रमाण पत्र के आवेदन आए हैं। इनमें से तकरीबन 25 की मौत हृदय रोग से हुई है।

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