Home बड़ी खबर नीतीश खुद कर रहे चौकीदारी, विपक्ष को भी बनाया चौकीदार; कहा- अभी नो पॉलिटिक्‍स

नीतीश खुद कर रहे चौकीदारी, विपक्ष को भी बनाया चौकीदार; कहा- अभी नो पॉलिटिक्‍स

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पटना। जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कोरोना मैनेजमेंट के नए फीडबैक सिस्टम के साथ काम करना आरंभ किया है। एक रुटीन के तहत विगत एक हफ्ते से उन्होंने पार्टी नेताओं से कोरोना को ले सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों के बारे में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से जमीनी हकीकत की जानकारी लेनी शुरू की है। पार्टी की निचली इकाई यानी प्रखंड व बूथ अध्यक्षों से इस बारे में बात हो रही है। इस क्रम में वह क्वारंटाइन सेंटर की स्थिति व राशन को लेकर चल रहे सर्वे तथा कोरोना के संदिग्धों की पहचान के लिए पल्स पोलियो की तर्ज पर चल रहे अभियान की बात करते हैैं। दिलचस्प बात यह है कि सीएम नीतीश खुद भी चौकीदारी कर रहे हैं और कोराना फीडबैक मैनेजमेंट सिस्टम में विपक्ष को भी चौकीदार की भूमिका दी है। फील्ड में तैनात अफसरों को यह हिदायत है कि विपक्ष के भी विधायकों व जनप्रतिनिधियों से समन्वय बनाए रखें। उन्‍होंने यह भी कहा कि कोरोना में अभी नो पॉलिटिक्‍स। 

शुक्रवार को मुख्यमंत्री ने जब कई जिलों में स्थित प्रखंडों के जदयू अध्यक्ष से बात की तो वह क्वारंटाइन सेंटर की बात कर रहे थे। प्रखंड स्तर पर जो क्वारंटाइन सेंटर चल रहे वहां रह रहे लोगों की संख्या पर बात हुई। देर शाम मुख्यमंत्री ने इस फीडबैक के साथ अधिकारियों के साथ भी समीक्षा की। यह बात आयी कि क्वारंटाइन सेंटर पर जितनी संख्या में लोग हैैं उस हिसाब से ही किचेन की व्यवस्था रहनी चाहिए। यह इसलिए जरूरी है कि ऐसा नहीं होने से वहां भोजन की व्यवस्था में देर संभव है। फीडबैक के दौरान क्वारंटाइन सेंटर के शौचालय और स्नानागार की व्यवस्था पर भी बात हो रही है। इन सब बातों की मॉनीटरिंग हो रही या नहीं। वैसे मुख्यमंत्री ने कल ही यह निर्देश दिया कि जिले के किसी वरिष्ठ अधिकारी से प्रखंड क्वारंटाइन सेंटरों की मॉनीटङ्क्षरग करायी जाए।  

सर्वदलीय बैठक के क्रम में ही मुख्यमंत्री ने यह निर्देेश दिया था कि स्थानीय विधायकों से जिला प्रशासन कोरोना वायरस की रोकथाम और राहत को ले चल रहे कार्यों के बारे में समन्वय करे। विपक्ष के विधायकों को भी यह कहा गया कि वे जानकारी उपलब्ध कराएं। गांव-गांव में घर-घर पल्स पोलियो की तर्ज पर चल रहे जांच अभियान पर भी फीडबैक जमीन स्तर पर काम कर रहे नेताओं से बात कर ली जा रही। उनसे यह भी पूछा जा रहा कि किस तरह से राशन कार्ड के लिए सर्वे हो रहा।

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