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घर जाने के लिए बिहार-यूपी के मजदूरों का हर्ल में हंगामा

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सिंदरी में फंसे हर्ल प्रोजेक्ट में कार्यरत मजदूरों ने घर वापसी को लेकर शनिवार को जमकर हंगामा किया। प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी भी की। इससे घंटों अफरातफरी की स्थिति रही। बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और पंजाब के रहनेवाले लगभग 300 मजदूर अपने घर जाने को आंदोलित हो गए। आक्रोशित मजदूरों को संभालने पुलिस तक पहुच गई। अंत में मजदूरों को आश्वस्त किया गया कि दो दिन के अंदर उन्हें घर भेजने की व्यवस्था की जाएगी। इसके बाद मजदूर शांत हुए और अपने कैंप में चले गए। मजदूर इस कदर आक्रोशित थे कि सोशल डिस्टेंसिंग आदि का भी ख्याल नहीं रखा। एकजुट हो नारेबाजी करते रहे।

शनिवार की सुबह पहले मजदूरों अपने-अपने कैंप में घर जाने के लिए हंगामा किया। मजदूरों के हंगामे की सूचना पाकर हर्ल के यूनिट हेड एमसी कर्ण पहुंचे। फिर सिंदरी थाना प्रभारी सह निरीक्षक राज कपूर भी पहुंचे। अधिकारियों के समझाने का भी मजदूरों पर असर नहीं पड़ा। दो टूक कहा कि वे लोग काम नहीं करना चाहते। यूनिट हेड कर्ण ने कहा कि जो भी प्रवासी मजदूर वापस घर जाना चाहते हैं, उनकी उनकी सूची उपायुक्त धनबाद को भेज दी गई है। उनसे स्वीकृति मिलते ही घर भिजवा दिया जाएगा। इतना सुनते ही मजदूर कैंप से बाहर निकलकर विरोध प्रदर्शन करने लगे। सड़क पर आकर खड़े हो गए। काफी देर तक सड़क जाम कर दी। हर्ल प्रबंधन के साथ-साथ प्रशासन के खिलाफ भी नारेबाजी की।

इसके बाद पुलिस एवं हर्ल के सुरक्षा अधिकारियों ने पहल की। सुरक्षा अधिकारी समरेंद्र सिंह ने मजदूरों को आश्वस्त किया कि दो दिन में घर वापसी की व्यवस्था होगी। इसके बाद मजदूर शांत हुए। मजदूरों का आरोप है कि हर्ल प्रबंधन पिछले 15 दिन से लॉकडाउन खुलने तथा सरकारी आदेश आने का आश्वासन देकर गुमराह कर रहा है। मजदूरों ने कहा कि अब प्रवासी मजदूरों की घर वापसी का आदेश आने के बावजूद भी हर्ल प्रबंधन हमें घर भेजने को तैयार नही है। पिछले पांच दिनों से सिर्फ मजदूरों का नाम लिखा जा रहा है। अभी तक एक भी मजदूर घर नहीं भेजा गया है। मजदूरों का आरोप है कि खाने की व्यवस्था भी ढंग से नहीं है। भूखे रहने से अच्छा परिवार के साथ रहेंगे। मजदूरों ने बताया कि अप्रैल माह का वेतन भी नहीं मिला है जबकि 5 मई तक वेतन मिल जाना चाहिए। ठेकेदार बहाना बना रहा है। ठेकेदार पर धमकी देने का आरोप लगाते हुए मजदूरों ने कहा कि बोला जा रहा है कि रहना है तो रहो, वरना जहां जाना चाहते हो जा सकते हो। इसी वजह से कुछ मजदूर पैदल ही अपने घर चले गए।

आदेश मिलते ही घर भेज देंगे : कर्ण

हर्ल के यूनिट हेड एमसी कर्ण ने बताया कि लॉकडाउन के कारण इन मजदूरों को सिंदरी में रखा गया है। वापसी के लिए जिन मजदूरों ने आवेदन पत्र दिया है। डीसी इनका आवेदन पत्र भेज दिया गया है। उनका आदेश होते ही इन मजदूरों को वापस लौटने की व्यवस्था कर दी जाएगी।

तय समय पर सिंदरी प्रोजेक्ट चालू होने पर संशय

मई 2021 से सिंदरी में हर्ल के उर्वरक प्रतिष्ठान से उत्पादन शुरू हो जाना है। लॉकडाउन के कारण उर्वरक प्रतिष्ठान के काम पर असर पड़ा है। अब आशंका है कि शायद तय समय पर उक्त प्रतिष्ठान से यूरिया का उत्पादन शुरू नहीं हो पाएगा। मालूम हो देश में फर्टिलाइजर की कमी को दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने एक साथ तीन उर्वरक प्रतिष्ठान सिंदरी, गोरखपुर एवं बरौनी में कारखाना स्थापित करने की स्वीकृति दी। सिंदरी खाद कारखाना से पूर्वी भारत को यूरिया की आपूर्ति होनी है। मामले पर हर्ल के यूनिट हेड ने कहा कि लॉकडाउन से प्रोजेक्ट निर्माण पर असर पड़ा है। प्रोजेक्ट निर्माण कार्य तय समय पर पूरा होगा या नहीं, यह लॉकडाउन खत्म होने के बाद ही आकलन कर कहा जा सकता है। प्रोजेक्ट में लगनेवाली मशीन फ्रांस और इटली से आनी हैं। लॉकडाउन के कारण मशीनें समय पर आएंगी या नहीं, इसपर निर्भर करेगा। वैसे 2021 मई तक प्रोजेक्ट में उत्पादन शुरू होने की तय समय सीमा है।

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