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बिहार में अब अनुमंडल स्तर पर भी बनेंगे आइसोलेशन सेंटर

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पटना।  बिहार लौट रहे बड़ी संख्या में प्रवासी श्रमिको को देखते हुए राज्य सरकार ने आइसोलेशन सेंटर की सुविधा बढ़ाने का निर्णय लिया है। जिससे कोरोना के गंभीर मरीजों को अलग रखकर उन्हें चिकित्सकीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सके। स्वास्थ्य विभाग के सचिव सह कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार ने बताया कि प्रवासी बिहारियों की बड़ी संख्या में आगमन को देखते हुए सरकार से जिला के साथ ही अनुमंडल स्तर पर आइसोलेशन की व्यवस्था करने की मंजूरी ली जाएगी। इससे अनुमंडल स्तरीय अस्पतालों में कोरोना के गंभीर मरीजों का इलाज किया जा सकेगा। 

स्वास्थ्य विभाग के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि राज्य में अभी आइसोलेशन सेंटर में 9 हजार बेड की सुविधाएं हैं। इसे बढ़ाकर 15 हजार बेड की किये जाने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए इन अस्पतालों में आवश्यकतानुसार डॉक्टरों, नर्सों, पारा मेडिकी स्टाफ की तैनाती भी की जाएगी, ताकि रोटेशन में 24 घंटे कोरोना मरीजों की निगरानी की जा सके।

आपदा विभाग के क्वारंटाइन सेंटरों में भी डॉक्टर तैनात 
विभागीय सूत्रों ने बताया कि आपदा विभाग के क्वारंटाइन सेंटरों में भी डॉक्टरों की तैनाती की गई है। जिससे वहां आने वाले प्रवासियों के स्वास्थ्य की जांच समय-समय पर की जा सके। किसी व्यक्ति में कोरोना के लक्षण दिखायी देने पर उसे तत्काल दवा दी जा सके। इनमें जो गंभीर मरीज है उन्हें हेल्थ क्वारंटाइन में ले जाया जाएगा। 

रेड व ग्रीन जोन से आने वालों को अलग रखा जा रहा
अधिकारियों के अनुसार इन कैम्पों में रेड और ग्रीन जोन से आने वालों को अलग-अलग रखा जा रहा है। अगर किसी में जरा सा भी कोरोना के लक्षण मिलते हैं तो उसे स्वास्थ्य विभाग की ओर से तैयार क्वारंटाइन कैम्पों में भेजा जाता है। अगर उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो उसका उपचार होता है, लेकिन निगेटिव रिपोर्ट आने पर भी उसे स्वास्थ्य विभाग ही 14 दिनों तक आइसोलेशन में रखता है।  

एसपी को मिला क्वारंटाइन सेंटरों की सुरक्षा का जिम्मा 
लौटनेवाले प्रवासी मजदूरों के लिए बनाए गए क्वारंटाइन सेंटर की देखरेख का जिम्मा एसपी को दिया गया है। एसपी खुद क्वारंटाइन सेंटर की सुरक्षा का जायजा लेंगे। अभी इन कैम्पों में जिला पुलिस के अफसर व जवानों की तैनाती की गई है। पर निरीक्षण के दौरान अगर एसपी को लगता है कि और अधिक सुरक्षा की जरूरत है तो वहां और जवानों की तैनाती होगी। एडीजी मुख्यालय जितेंद्र कुमार ने बताया कि क्वारंटाइन सेंटर की सुरक्षा को जिला पुलिस द्वारा अफसर व जवानों को जरूरत के हिसाब से तैनात किया गया है। एसपी स्तर से यह तैनाती हुई है। पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों को क्वारंटाइन सेंटरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा है। पुलिस लाइन से वहां फोर्स प्रतिनियुक्त होंगे। 

सवा छह लाख को रखने को क्वारंटाइन कैंप तैयार 
दूसरे राज्यों से आ रहे प्रवासी श्रमिकों की संख्या को देखते हुए क्वारंटाइन कैम्पों की संख्या में और वृद्धि होगी। प्रखंड व पंचायत स्तर पर बन चुके क्वारंटाइन कैम्पों में सवा छह लाख को रखने की व्यवस्था की जा चुकी है। आने वाले दिनों में प्रवासी श्रमिकों की संख्या के अनुसार प्रखंड से लेकर पंचायत स्तरीय क्वारंटाइन कैम्पों की संख्या और बढ़ाई जाएगी। आपदा प्रबंधन के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत के अनुसार दूसरे राज्यों से आ रहे श्रमिकों के लिए अभी 172 आपदा राहत केंद्र चलाए जा रहे हैं। इन केंद्रों में अभी 1 लाख 32 हजार 226 लोग रह रहे हैं।

3665 कैम्प हैं अभी 
मजदूरों की संख्या के अनुमान के आधार पर प्रखंड स्तरीय क्वारंटाइन कैम्प बनाए गए हैं। प्रखंड स्तर पर 3665 कैम्प बनाए जा चुके हैं। इनमें 3 लाख 75 हजार को ठहराने की व्यवस्था है। पंचायत स्तर पर भी क्वारंटाइन कैम्प बने हैं। इनमें 2 लाख 42 हजार लोगों को ठहराया जा सकता है। बिहार के लिए अब तक 187 ट्रेनों की र्बुंकग हुई है। इससे 2 लाख 15 हजार से अधिक श्रमिकों के बिहार आने की संभावना है। इसमें सबसे अधिक गुजरात से 36 ट्रेनों की बुकिंग हुई है। 

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