Home बिहार की शान कोरोना से लड़ेगा आइआइटी पटना का नर्सिंग रोबोट, दवा व खाना भी पहुंचाएगा; जानें क्‍या है कीमत

कोरोना से लड़ेगा आइआइटी पटना का नर्सिंग रोबोट, दवा व खाना भी पहुंचाएगा; जानें क्‍या है कीमत

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पटना। अस्पतालों में भर्ती कोरोना मरीजों की सेवा करने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी), पटना नर्सिंग रोबोट तैयार कर रहा है। रोबोट में लगे कैमरे और स्पीकर के माध्यम से डॉक्टर अपने चैंबर से ही मरीज से बातचीत कर सकेंगे। स्क्रीन पर डॉक्टर मरीज को देख भी सकेंगे। पीडि़त के बेड तक रोबोट दवा और खाना भी पहुंचाएगा। सब कुछ ठीक रहा तो राज्य के कोरोना अस्पताल में तब्दील नालंदा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (एमएमसीएच) में नर्सिंग रोबोट अगले सप्ताह से काम शुरू कर देगा। 

आइआइटी के इंक्यूबेशन सेंटर के पंकज कुमार सिंह ने बताया कि नर्सिंग रोबोट सेंसर कंट्रोल्ड है। कंप्यूटर आधारित होने के कारण इसे संचालित करने में परेशानी नहीं होगी। रोबोट से काम लेने के लिए मरीज के बेड नंबर व नाम के साथ ऑपरेशनल (किया जाने वाला) काम कम्प्यूटर में फीड करना होगा। अभी हर दिन टीम इसकी गुणवत्ता को बढ़ाने में जुटी है। पंकज के साथ इस प्रोजेक्ट में रितेश कुमार ङ्क्षसह, अमित कुमार ङ्क्षसह और अभिषेक राज भी जुड़े हैं। 

विदेश से तीन गुना सस्ता

टीम मेंबर के अनुसार इतने फीचर वाले रोबोट अमेरिका और यूरोप के बाजार में तीन लाख रुपये में मिलते हैं, मगर आइआइटी में तैयार नर्सिंग रोबोट की कीमत एक लाख रुपये है। दूसरे फेज में कई एडवांस फीचर शामिल किए जाएंगे जिसके बाद इसकी कीमत 1.5 लाख रुपये के आसपास आएगी। थोक में निर्माण पर लागत 15 से 20 फीसद कम हो जाएगी। इसके लिए आइआइटी पटना के इंक्यूबेशन सेंटर या सिबिलिन रोबोटिक्स प्राइवेट लिमिटेड की वेबसाइट पर संपर्क करना होगा। दूसरे फेज के रोबोट से डॉक्टर मरीजों की पल्स और तापमान भी जान सकेंगे। कंट्रोलिंग दायरा 100 मीटर से अधिक हो जाएगा। एडवांस स्टेज में यह एक किलोमीटर दूर से कंट्रोल किया जा सकेगा। 

हॉस्पिटल में यदि सैनिटाइजेशन टनल है तो रोबोट ऑपरेशन के बाद खुद ही वहां जाकर सैनिटाइज हो जाएगा। टनल नहीं है तो स्प्रे का छिड़काव कर सैनिटाइज किया जा सकता है। सैनिटाइजर नैपकिन से भी इसे सैनिटाइज किया जा सकता है। इंक्यूबेशन सेंटर के प्रोफेसर इंचार्ज प्रो. प्रमोद कुमार तिवारी ने बताया कि कोरोना के इलाज में डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी संक्रमित नहीं हो, इसी उद्देश्य से इसे तैयार किया गया है। कई स्तर के परीक्षण में यह पूरी तरह सफल रहा है। 

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