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बिहार में कोरोना ने थमाए ई-ऑफिस प्रणाली, वर्क फ्रॉम होम जैसे तकनीक के नए हथियार

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पटना। कोरोना ने बहुत कुछ बदल दिया है। खासतौर से कार्य संस्कृति में तो भारी बदलाव हुआ है। यह बदलाव प्राइवेट सेक्टर ही नहीं, सरकारी क्षेत्र में भी आया है। अधिकारी तमाम काम घर से ही कर रहे हैं। वीडियो कांफ्रेंसिंग इस दौर में बड़ा हथियार बनकर उभरा है। जिले ही नहीं प्रखंड भी सीधे जुड़ गए हैं। कैदियों से मुलाकात भी वीडियो कांफ्रेंसिंग से हो रही है। जरूरतमंदों को लॉक डाउन में बाहर निकलने को ई-पास जारी हो रहे हैं। घटनाओं की फोरेंसिक जांच भी ऑनलाइन हो रही है। राज्य सरकार ने सभी कार्यालयों में ई-ऑफिस प्रणाली लागू करने का ऐलान किया है। बच्चों की पढ़ाई भी ऑनलाइन और दूरदर्शन से हो रही है। 

लॉकडाउन ने भले ही लोगों को घर में रहने को विवश किया हो मगर इस संक्रमण काल में कई खास प्रयोग भी हुए हैं। खासतौर से सूचना तकनीक के क्षेत्र में, ताकि तमाम सरकारी सेवाएं लोगों तक सुचारू ढंग से पहुंच सकें। ‘वर्क फ्रॉम होम’ की संस्कृति अब निजी के साथ ही सरकारी क्षेत्र का भी हिस्सा बन गई है। दिल्ली या पटना से दिए गए निर्देश बिहार के दूरस्थ प्रखंडों की हर ग्राम पंचायत तक सीधे पहुंचना, इसी अवधि में संभव हुआ है। अब तक दिल्ली एनआईसी के जरिए जिला मुख्यालयों से तो जुड़ी थी लेकिन प्रखंडों तक उसकी पहुंच नहीं थी।  

ई-ऑफिस का सरकारी काम का ढर्रा ही बदल जाएगा
एनआईसी के ई-ऑफिस सॉफ्टवेयर से सरकारी कामकाज का ढर्रा ही बदल जाएगा। साहब के साइन कराने को अब उनके दफ्तर आने का इंतजार नहीं करना होगा। न ही छुट्टी स्वीकृत कराने के लिए ऑफिस के चक्कर काटने होंगे। इस सॉफ्टवेयर की मदद से तमाम काम इलेक्ट्रॉनिक विधि से आसानी से हो जाएंगे। मुख्य सचिव दीपक कुमार ने सभी विभागों में ई-ऑफिस प्रणाली लागू करने का निर्देश दिया था। इसके क्रियान्वयन के लिए सूचना प्रावैधिकी विभाग के सचिव राहुल सिंह ने सभी अपर मुख्य सचिवों, प्रधान सचिवों, सचिवों और जिलाधिकारियों के लिए पत्र भी भेजा है।

लॉकडाउन में कई सेवाएं और प्रशिक्षण ऑनलाइन की गईं
लॉकडाउन के दौरान राजस्व विभाग के कामकाज में काफी परिवर्तन आया है। जमीन संबंधी सेवाएं जैसे-ऑनलाइन दाखिल खारिज करना आदि पहले से लागू कर दी गई थी। लेकिन इसे कारगर बनाने के लिए नया परिमार्जन पोर्टल लागू किया गया। इससे जमा बंदियों की त्रुटियां आसानी से दूर हो सकेंगी।  विभाग ने नव चयनित सहायक बंदोबस्त पदाधिकारियों और कानूनगो की ऑनलाइन ट्र्रेंनग शुरू कर दी है। नव चयनित अमीनों को भी ऑनलाइन ट्र्रेंनग दी जाएगी। अमीनों को जमीन की पैमाइश आदि कई सैद्धांतिक बातों की जानकारी दी जानी है। मालूम हो कि राज्य में ऑनलाइन दाखिल खारिज और ऑनलाइन लगान जमा करने की व्यवस्था भी पहले से कर दी गई है।

मोबाइल एप से मछलियों की हो रही है खरीद-बिक्री
लॉकडाउन के बीच  पशुपालन विभाग और इसके अधीन मत्स्य निदेशालय  के कामकाज में भी काफी बदलाव आया। निदेशालय ने लॉकडाउन में लोगों के बाहर निकलने में हो रही कठिनाइयों को देखते हुए एक नया मोबाइल ऐप ही लांच कर दिया। इस ऐप से मछलियों की ऑनलाइन खरीद बिक्री शुरू हो गई। खास बात यह रही कि इस ऐप से मछलियों के खुदरा विक्रेता से लेकर थोक विक्रेता तक जुड़ गए।

मछलियों के दाना और जीरा की बिक्री करने वाले भी इसी प्लेटफार्म से जुड़ गए । 200 से अधिक खुदरा विक्रेता जुड़ गए जो आम उपभोक्ताओं के डिमांड पर उनकी मनचाही मछलियां निर्धारित कीमतों पर उनके घरों तक पहुंचाने लगे। आम लोगों, खासकर मछलियों के शौकीनों को काफी राहत मिली। चूंकि बाहर बाजार में मछलियां की बिक्री सामान्य नहीं हुई थी, अन्य जिलों से उनकी आवक भी काफी कम थी इसके मद्देनजर मोबाइल ऐप के माध्यम से ऑनलाइन  मछलियों की खरीद बिक्री से लोगों को काफी राहत मिली। ऑनलाइन ही भुगतान की व्यवस्था भी की गई। लॉकडाउन की अवधि में विभाग ने खुदरा विक्रेताओं को भी ऑनलाइन भुगतान ग्रहण करने के लिए खूब प्रोत्साहित किया। नेट बैंकिंग, पेटीएम आदि के माध्यम से भुगतान की प्रक्रिया को प्रोत्साहित किया गया।

सरकार ने गरीबों – जरूरतमंदों  के लिए कई राहत कार्य शुरू किए  
लॉकडाउन के कारण उत्पन्न स्थिति में खासकर गरीबों, प्रवासी मजदूरों और किसानों के लिए राज्य सरकार ने कई राहत कार्य चलाए। इसी क्रम में सवा करोड़ से अधिक राशनकार्ड धारियों के खाते में एक-एक हजार भेजे गए। साथ ही नए राशन कार्ड बनाने और शेष को भी यह राशि देने का निर्देश मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दिया है। इस पर तेजी से काम चल रहा है। वहीं, दूसरे राज्यों में लॉकडाउन में फंसे बिहार के 19 लाख 58 हजार लोगों के खाते में एक-एक हजार भेजे गए। प्रवासी मजदूरों को दूसरे राज्यों से लाने के लिए ट्रेन चलाने का आग्रह मुख्यमंत्री ने केंद्र से किया और ट्रेनें चलाई गईं। देश के तमाम राज्यों से सवा लाख से अधिक प्रवासी मजदूर इन विशेष ट्रेनों से बिहार आ चुके हैं। वहीं दो लाख से अधिक आने वाले है। मजदूरों को स्टेशनों पर से प्रखंड स्तरीय क्वारनटाइन सेंटर में ले जाया जा रहा है। इन सेंटरों में मजदूरों को 21 दिनों तक रखा जाएगा। 21 दिनों बाद ये घर जाएंगे तो उस समय उन्हें ट्रेन से आने का पूरा खर्च और 500 रुपये अलग से दिए जाएंगे। यह राशि कम-से-कम एक हजार होगी। इसके साथ ही पंचायत स्तर पर भी क्वारनटाइन सेंटर चलाए जा रहे हैं। वहां भोजन और आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध कराई गईं। 

कोटा से 15 हजार से अधिक छात्रों को विशेष ट्रेनों से बिहार सरकार ने वापस बुलाया। इन छात्रों के एवज में बिहार सरकार ने हर ट्रेन के लिए सात लाख से अधिक राशि रेलवे को दी। राज्य में 172 आपदा राहत केंद्र चल रहे हैं, जहां पर 70 हजार से अधिक लोग रह रहे हैं। राज्य के नौ राज्यों के बड़े 12 शहरों में बिहार फाउंडेशन के माध्यम से फंसे बिहारियों के लिए भोजन-राशन की व्यवस्था की गई।

लॉकडाउन में फंसे सभी संविदा कर्मियों को पूरा वेतन देने का आदेश दिया गया है। मिड-डे मिल के एवज में बच्चों के खाते में राशि भेजी जा रही है। आंगनबाड़ी के बच्चों के लिए खाद्यान्न के पैसे समेत दूध के पाउडर उनके घरों में पहुंचाए जा रहे हैं।  

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