Home बड़ी खबर घोषणाओं में घुट रहा अंतरराष्ट्रीय पर्यटक स्थल बोधगया का विकास

घोषणाओं में घुट रहा अंतरराष्ट्रीय पर्यटक स्थल बोधगया का विकास

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गया । केंद्र व राज्य सरकार द्वारा बोधगया के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों को पर्यटक स्थलों के रूप में विकसित करने की समय-समय पर घोषणाएं की जाती रही हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। शहरी क्षेत्र स्थित विभिन्न देशों के बौद्ध मठों का परिभ्रमण करने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों हिचकोले खाते हुए आवागमन करना पड़ता है। कारण, बोधगया की सड़क की स्थिति जर्जर है। मरम्मत के नाम पर महज खानापूर्ति की गई। शहरी क्षेत्र स्थित विदेशी बौद्ध मठों के मार्ग की स्थिति बदतर है तो सुदूरवर्ती क्षेत्रों में स्थित प्राचीन ऐतिहासिक सनातन और बौद्ध पर्यटन स्थल का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। आदि शंकराचार्य मठ : दो वर्ष पहले आदि शंकराचार्य मठ को हृदय योजना से विकसित करने की घोषणा हुई थी। कार्य कराने के लिए जगह खाली चाहिए, लेकिन ऐसा है नहीं। मठ को गोशाला में तब्दील करना भी कार्य शुरू नहीं होने का एक प्रमुख कारण है।

सुजाता स्तूप : निरंजना नदी के पूर्वी तट पर बकरौर ग्राम स्थित सुजाता स्तूप बौद्ध पर्यटकों के लिए पूजनीय है। यहां सालभर विदेशी सैलानियों का आवागमन होता है, लेकिन शाम होते ही यहां घुप अंधेरा छा जाता है। आज तक इस ओर ध्यान नहीं दिया गया। बकरौर ग्राम सांसद आदर्श ग्राम में शामिल है। मातंगवापी वेदी : मातंग ऋषि का यह स्थल वैसे तो पिंडवेदी के रूप में ख्यात है, लेकिन इसके परिसर में विभिन्न देवी-देवताओं के मंदिर हैं। वेदी के बाहर एक सरोवर है, जो जर्जर स्थिति में है। मंदिर की देखरेख समय-समय पर स्थानीय पुजारी द्वारा स्वयं के खर्च से किया जाता है। धर्मारण्य वेदी : धर्मारण्य वेदी पर पितृपक्ष के तृतीया तिथि को तर्पण व पिंडदान का विधान है। हालांकि, यहां सालभर पिंडदानी आते-जाते रहते हैं। इस वेदी का कुछ विकास जिला प्रशासन व डालमिया परिवार द्वारा कराया गया, लेकिन यहां भी प्रकाश की व्यवस्था नाकाफी है। मुचलिंद सरोवर : मोचारीम गांव स्थित मुचलिंद सरोवर का विकास सरकार स्तर से कराया जा रहा है, लेकिन विकास की गति काफी धीमी है। इसके लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्वयं दिलचस्पी दिखाई थी। स्थल का निरीक्षण भी किया था।

इस सरोवर के आसपास की जगह के सुंदरीकरण करने की योजना थाईलैंड की एक बौद्ध संस्था द्वारा बनाई गई थी, लेकिन क्रियान्वित नहीं हो सकी। —- हृदय योजना से ढुंगेश्वरी पहाड़ से आदि शंकराचार्य मठ तक विकास की योजनाएं थी। 10 किलोमीटर की दूरी में पांच स्थलों पर विश्राम स्थल बनाना था, जो बन चुका है। ढुंगेश्वरी पहाड़ी के उपर कुछ विकास कार्य होने हैं। मठ भी हृदय योजना में चयनित है, लेकिन मठ का माहौल कार्य में बाधक है। इसके कारण कार्य को क्रियान्वित नहीं कराया जा सका है। अभिषेक कुमार, आर्किटेक इंजीनियर, हृदय योजना

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