Home देश बड़े पैकेज का पहला दिन: वित्त मंत्री सीतारमण ने 6 लाख करोड़ के पैकेज का किया ऐलान

बड़े पैकेज का पहला दिन: वित्त मंत्री सीतारमण ने 6 लाख करोड़ के पैकेज का किया ऐलान

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नई दिल्ली। एक दिन पहले पीएम नरेंद्र मोदी जिस 20 लाख करोड़ रुपये के भारी भरकम आर्थिक पैकेज का ऐलान कर हर तबके में आशा की किरण जगाई थी उसकी पहली किस्त छह लाख करोड़ की है। बुधवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अलग-अलग सेक्टरों के लिए कुल 15 घोषणाएं की। इन घोषणाओं के जरिए सिस्टम में कुल 5,94,250 करोड़ रुपये डाला जाएगा जिससे कोविड-19 की वजह से बंदी के कगार पर पहुंच चुके लाखों छोटे व मझोले उद्योगों में नई जान पड़ सकती है। साथ ही इसमें रीयल एस्टेट और एनबीएफसी के समक्ष फंड की दिक्कत को भी दूर करने के उपाय हैं। सरकार ने टीडीएस की दर को घटाते हुए आम आय कर दाताओं के लिए रिटर्न भरने की तारीख भी बढ़ा दी है और विवाद से विश्वास तक स्कीम के तहत बिना जुर्माने की कर अदाएगी तारीख भी बढ़ा कर 31 दिसंबर कर दिया है।

वित्त मंत्री दो दिन और आर्थिक पैकेज के विभिन्न हिस्सों के बारे में देंगी जानकारी

वित्त मंत्री सीतारमण अभी दो दिनों तक और आर्थिक पैकेज के विभिन्न हिस्सों के बारे में जानकारी देंगी। वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर व अपने मंत्रालय के दूसरे आला अधिकारियों के साथ प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए सीतारमण ने कहा कि जो भी घोषणाएं होंगी वे पीएम मोदी की सोच के मुताबिक भूमि, श्रम, लिक्विडिटी और कानून के दायरे में होंगी। पूरा फोकस सूक्ष्म, लघु व मझोली औद्योगिक इकाइयों (एमएसएमई) पर फिलहाल होगा। लेकिन हम दूसरे उद्योग धंधों के साथ आम जनता को भी मौजूदा परेशानी से उबरने में मदद करेंगे। हमारा पूरा मकसद यह है कि अर्थव्यवस्था की रफ्तार भी बढ़े व भारत एक आत्मनिर्भर देश भी बनें।

बेरोजगारी खतम करने के लिए वित्त मंत्री ने की 15 घोषणाएं

कोविड-19 की लड़ाई में जिस तरह से देश भर में बेरोजगारी की स्थिति बनी है उसे दूर करने के लिए छोटे व मझोले उद्योगों की भूमिका काफी अहम होगी। संभवत: यही वजह है कि वित्त मंत्री ने जो 15 घोषणाएं की हैं उनमें से 11 प्रत्यक्ष या परोक्ष तौर पर एमएसएमई सेक्टर को ही फायदा पहुंचाने वाली हैं।

उद्योगों में कार्यरत करोड़ों लोगों का रोजगार सुरक्षित

इस सेक्टर से जुड़े कई मुद्दे जैसे परिभाषा बदलना पिछले छह वर्षो से लटकी हुई थी, लेकिन अब उन पर एक झटके में फैसला हो गया। तीन लाख करोड़ रुपये का बगैर किसी कोलेटरल (बंधक) के कर्ज देने की स्कीम से इन उद्योगों में कार्यरत करोड़ों लोगों का रोजगार भी सुरक्षित रहेगा। बैंकों व वित्तीय संस्थानों से मिलने वाले कर्ज को अपनी गारंटी दे कर सरकार ने इन्हें कर्ज मिलने की राह की फिलहाल सबसे बड़ी दिक्कत को भी दूर कर दिया है।

बैंक लोन की गारंटी 

सरकार बखूबी समझ रही है कि अभी अर्थ-चक्र ठप्प है और इसे आगे बढाने के लिए उसे बैंक लोन की गारंटी देनी ही होगी। यही वजह है कि एमएसएमई सेक्टर से लेकर एनबीएफसी को मिलने वाले बैंकिंग कर्ज पर भी सरकार की गारंटी देने का फैसला किया गया है। मजबूत व बड़े एनबीएफसी को 30 हजार करोड़ रुपये का गारंटीशुदा कर्ज और छोटे व कम रेटिंग वाले एनबीएफसी के लिए आंशिक गारंटी क 45 हजार करोड़ रुपये की स्कीम का ऐलान भी एमएसएमई को फायदा पहुंचाएगा।

पैकेज के पहले चरण में कुछ सेक्टरों को तत्काल राहत की दरकार

20 लाख करोड़ रुपये के पैकेज के पहले चरण में उन सेक्टर पर खास तौर पर ध्यान दिया गया है जिन्हें तत्काल राहत की दरकार है। मसलन, रीयल एस्टेट कंपनियां को रेरा कानून के अहम प्रावधानों से छह महीने की राहत का दिया जाना और बिजली वितरण कंपनियों को बकाये के भुगतान के लिए 90 हजार करोड़ रुपये का इंतजाम करवाना। पीएम मोदी ने मंगलवार को लोकल के लिए भोकल होने का नारा दिया था और बुधवार को वित्त मंत्री ने सरकारी क्षेत्र से निकलने वाले 200 करोड़ रुपये के ठेके में विदेशी कंपनियों के प्रवेश की रोक लगाने का ऐलान किया।

कर्मचारियों के तीन महीने का प्रोविडेंट फंड मोदी सरकार जमा करेगी

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज का दायरा बढ़ाते हुए 100 कर्मचारियों वाले इकाइयों में इम्पलाइज प्रोविडेंट फंड में नियोक्ता व कर्मचारी के योगदान सरकार अब तीन महीने (जून से अगस्त, 2020) अपनी तरफ से करेगी। इस मद में 2500 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके पहले मार्च से मई, 2020 का ऐलान पहले ही किया गया था। हालांकि सरकार ने ईपीएफ में नियोक्ता व कर्मचारी के लिए योगदान को मूल वेतन के 12-12फीसद से घटा कर 10-10 फीसद करने का फैसला किया है। इससे तीन महीने में दोनों के पास 6750 करोड़ रुपये बचेंगे लेकिन इसका दूसरा पहलू यह है कि कर्मचारियों के बचत में तीन महीने के लिए 4 फीसद का नुकसान है।

आय कर रिटर्न की तारीख बढ़ा कर 30 नवंबर की, शीघ्र खाते में आएगा रिफंड

कर नियमों में जो बदलाव किये गये हैं उनमें प्रमुख टीडीएस व टीसीएस के दरों में 25 फीसद की कटौती करना। सरकार का कहना है कि इससे 50 हजार करोड़ रुपये की राशि बाजार सिस्टम में उपलब्ध होगा। सभी तरह के टैक्स रिफंड को 45 दिनों के भीतर लौटाने का फैसला भी इसी दिशा में उठाया गया कदम है। जबकि टैक्स रिटर्न भरने की अंतिम तारीख 31 जुलाई से बढ़ा कर 31 अक्टूबर व टैक्स आडिट की अंतिम तारीख 30 सितंबर से बढ़ा कर 31 अक्टूबर,2020 कर दिया गया है। कर गणना की अंतिम तारीख 30 सितंबर से बढ़ा कर 31 दिसंबर, 2020 और 31 मार्च, 2021 से बढ़ा कर 30 सितंबर, 2021 करने का फैसला किया गया है।

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