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कोरोना की जांच में आरटी-पीसीआर एप बना जी का जंजाल

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इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) से अधिकृत सरकारी टेस्टिंग लैब में विडॉल टेस्ट के साथ रिजर्व ट्रांसक्रिप्शन पॉलीमरेस चेन रिएक्शन (आरटी-पीसीआर) को भी शुरू किया है। साथ ही कोरोना जांच की डिजिटल मॉनिटरिंग के लिए आरटी-पीसीआर एप लांच किया गया है।पांच दिनों से झारखंड के कोरोना सैंपल कलेक्शन सेंटर और चारों सरकारी टेस्टिंग लैब में इसे अनिवार्य कर दिया गया है। हालांकि यह लैब और टेस्टिंग सेंटर के लिए जी का जंजाल बन गया है। पहले कोरोना सैंपल का ब्योरा : टेस्टिंग लैब में मैनुअल तरीके से दर्ज होता था। इसमें समय लगने के कारण तकनीशियन जांच को अधिक समय नहीं दे पा रहे थे। डिजिटल मॉनिटरिंग भी नहीं हो पा रही थी। इसे देखते हुए आरटी-पीसीआर को लांच करने के साथ लैब के बजाय कलेक्शन सेंटर को डाटा तैयार करने की जिम्मेवारी सौंप दी गई। कलेक्शन सेंटर के सभी तकनीशियन को इसे मोबाइल में डाउनलोड करना है और प्रत्येक सैंपल नंबर के साथ मरीज का ब्योरा भरते हुए मोबाइल को कंफिगर करना है। ताकि मरीज से कहीं से भी संपर्क किया जा सके। दिक्कत यह है कि एमजीएम समेत दूसरे कलेक्शन सेंटर में कई लैब तकनीशियन के पास स्मार्टफोन नहीं हैं। वहीं, कई संदिग्धों के पास भी स्मार्टफोन नहीं हैं। एप में संदिग्ध के मोबाइल को कंफिगर करने में ओटीपी कई घंटे बाद जेनरेट हो रहा है। इससे मोबाइल कंफिगरेशन में घंटों लग रहे हैं। एमजीएम में हर दिन 20-35 तक नमूने कलेक्ट हो रहे हैं, जिनका आरटी-पीसीआर अपडेट करने में आठ घंटे लग जा रहा है। नियमानुसार लैब को बिना अपडेट कोई भी नमूना स्वीकार नहीं करना है। एमजीएम उपाधीक्षक डॉ. नकुल प्रसाद चौधरी ने बताया कि हाईस्पीड वाईफाई की व्यवस्था की जा रही है।

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