Home झारखंड कोरोना संकट में किचन गार्डन को बढ़ावा देकर दूसरों के लिए प्रेरणा बनी ये दंपति

कोरोना संकट में किचन गार्डन को बढ़ावा देकर दूसरों के लिए प्रेरणा बनी ये दंपति

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दुमका. कोरोना संक्रमण (Corona Infection) से बचने के लिए घर में रहना जरूरी है, पर घर में मन उब जाए, तो क्या करें. दुमका की एक दंपति ने इसके लिए खास रास्ता ढूंढ़ा. पति कारोबारी हैं और पत्नी शिक्षिका. दोनों ने किचन गार्डन (Kitchen Garden) में वक्त और मन लगाया. नजीता सुखद है. अब इस परिवार को सब्जी के लिए बाजार जाना नहीं पड़ता है. घर की छत पर बने गार्डन से सब्जी की जरूरत पूरी हो जा रही है. दूसरी ओर बाजार जाने से संक्रमित होने का जो खतरा मंडराता, उससे भी छुटकारा मिल गया है.दुमका के नामितपाड़ा मुहल्ले में रहने वाले सीतेश जयसवाल और उनकी पत्नी पूजा रानी की हर तरफ प्रशंसा हो रही है. इनका किचन गार्डन लोगों को खूब पसंद आ रहा है. सीतेश जयसवाल व्यवसायी हैं, जबकि पत्नी पूजा रानी शास्त्री स्मारक मध्य विद्यालय में शिक्षिका हैं. दोनों को बागवानी का शौक पहले से है. पहले अपने घर की क्षत पर गमला में फूल का पौधा लगाया करते थे. लेकिन कोरोना बंदी के कारण विद्यालय बंद है. घर में रह-रह कर मन उबने लगा तो इस दंपति ने किचेन गार्डन लगाने की योजना बनाई. अपने एक हजार स्कायर फीट मकान के छत पर लगभग पांच सौ गमले में फूल के साथ-साथ मौसमी सब्जी के पौधे लगाए. अब इनकी मेहनत रंग लाने लगी है. बिना रासायनिक खाद के इनके इस किचन गार्डेन में भिंडी, करेला, हरी मिर्च, धनिया पत्ता, कड़ी पत्ता सहित कई सब्जी और फल उग रहे हैं. इस परिवार को फिलहाल सब्जी के लिए बाजार जाने की जरूरत नहीं पड़ती.पत्नी पूजा रानी कहती हैं कि कोरोना बंदी में स्कूल बंद हो गया, तो घर पर रहकर समय व्यतीत करना काफी कठिन लगने लगा. पहले छत पर गमला में फूल के पौधा लगाते थे. लेकिन अचानक किचन गार्डन का ख्याल आया. काफी गमला यूं ही खाली पड़ा हुआ था. बाजार से मौसमी सब्जी का बीज मंगवाकर इसमें लगाया दिया. सुबह- शाम छत पर पौधों की देखभाल कर वक्त भी गुजार और अब सब्जी भी मिल जा रही है. पति सीतेश जयसवाल का कहना है कि किचन गार्डन से शारीरिक और मानसिक संतुलन बना रहता है. साथ ही आस-पास का पर्यावरण भी शुद्ध रहता है.

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