Home झारखंड गरीब को बेटे की लाश लाने पर खर्च करने पड़े ₹19000,खुले ट्रक में भेजे गए मजदूरों के शव:Auraiya Accident

गरीब को बेटे की लाश लाने पर खर्च करने पड़े ₹19000,खुले ट्रक में भेजे गए मजदूरों के शव:Auraiya Accident

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औरेया/रांची. सड़क हादसे (Road Accident) में मजदूरों की मौत के बाद उनके शव को उनके घर तक पहुंचाने को लेकर सरकार की व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं. उत्तर प्रदेश के औरेया (Auraiya) में हुए सड़क हादसे में मृत अपने बेटे के शव को लाने के लिए खेत में काम करने वाले एक गरीब को 19 हजार रुपये खर्च करने पड़े. बेटे के शव को लेने के लिए यह शख्‍स झारखंड के पलामू से औरेया एक कार से गया, जिसके के लिए उन्‍हें 19 हजार रुपये खर्च करने पड़े. ऐसे में शवों को लाने की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं.झारखंड के पलामू में रहने वाले खेत मजदूर सुदामा ने बताया कि उन्होंने एक कार चालक को 19,000 रुपये का भुगतान किया था, जो उन्‍हें और उनके जीजा गुड्डू यादव को औरैया लाया था. बीते रविवार को औरेया में शव गृह के बाहर 43 वर्षीय सुदामा यादव अपने बेटे का शव मिलने का इंतजार कर रहे थे. उनके सबसे बड़े बेटे 21 वर्षीय नीतीश की मौत औरेया सड़क हादसे में हो गई थी. बीते शनिवार को राजस्थान और दिल्ली से घर की ओर जाने वाले प्रवासियों को ले जा रहे दो वाहनों की टक्कर में उत्तर प्रदेश के औरेया में उसकी मौत हो गई थी.नीतीश जयपुर में एक मार्बल फैक्ट्री में काम करता था. सुदामा कहते हैं, ‘मैंने बीते शुक्रवार शाम 8 बजे के आसपास अपने बेटे से आखिरी बार बात की. उसने कहा कि वह गया (बिहार) के लिए एक ट्रक में सवार हुए थे और अगले दिन पहुंचेगा. शनिवार सुबह मैंने टीवी पर देखा कि एक दुर्घटना हुई थी और इसमें शामिल ट्रकों में से एक राजस्थान से आ रहा था. मैंने अपने बेटे को फोन करने की कोशिश की लेकिन उसका फोन स्विच ऑफ था. मैंने एक और व्यक्ति को बुलाया जिसने नीतीश के साथ काम किया और उससे जानकारी ली. इसके बाद वे औरेया के लिए रवाना हुए. वहां उन्हें बताया गया कि जिला प्रशासन उनके बेटे के शव का परिवहन सुनिश्चित करेगा.खबर के मुताबिक सुदामा की एक बेटी है जिसने अभी स्कूल पूरा किया है और आठवीं कक्षा में एक छोटा बेटा है. सुदामा के मुताबिक सबसे बड़ा, नीतीश, सातवीं कक्षा के बाद बाहर कमाने चला गया. लॉकडाउन के दो महीने बाद तक उसे वेतन नहीं दिया गया था. 13 मई को, मैंने उसे 3,000 रुपये भेजे ताकि वह वापस लौट सके.

झारखंड के ही विकास कालिंदी कहते हैं कि भाई रंजन कालिंदी की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई. उनके चाचा, उमेश कालिंदी और उनके गांव के तीन अन्य लोग घायल हो गए. रंजन एक ट्रक की टक्कर में मर गया और अब उसका शरीर भी एक ट्रक पर घर जा रहा है. खुले ट्रकों में भाई का शव ले जाने से वो और उसके ​परिवार वाले आक्रोशित थे. विकास के भाई सल्बो कालिंदी ने कहा— विकास ने मुझे वीडियो भेजे, शरीर कैसे लाए जा रहे थे. यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है. यही कामना है कि शव विघटित न हो. ट्रक सोमवार से पहले नहीं पहुंचेगा.औरेया हादसे के मृतकों के शवों को खुले ट्रक में भेजने के आरोप ​प्रशासन पर लगे. हालांकि शवगृह के अधिकारियों ने कहा कि कुछ शवों को बर्फ के ब्लॉक पर रखे जाने के बाद ट्रकों में पहले ही भेज दिया गया था. खबर के मुताबिक औरैया के एएसपी एसपी कमलेश कुमार दीक्षित ने कहा कि एक खुले ट्रक में कोई शव नहीं भेजा गया था. कुछ को कवर डीसीएम ट्रकों में भेजा गया था, कुछ एसयूवी में, लेकिन खुले ट्रक में कोई भी नहीं.

झारखंड सरकार ने बताया ‘अमानवीय’

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि ट्रकों में शवों को भेजना अमानवीय है. मैं यूपी और बिहार के सीएम से झारखंड तक बेहतर स्थिति में शव भेजने का अनुरोध किया हूं. मृतकों में झारखंड के 11 में से प्रत्येक के परिवार को 4 लाख रुपये और प्रत्येक घायल को 50,000 रुपये देने का ऐलान सरकार कर चुकी है.

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