Home सियासत सोनिया ने बिहार महागठबंधन में फूंकी जान, तेजस्‍वी-मांझी और कुशवाहा से की मन की बात

सोनिया ने बिहार महागठबंधन में फूंकी जान, तेजस्‍वी-मांझी और कुशवाहा से की मन की बात

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पटना । लॉकडाउन-4 की रियायतों को देखते हुए महागठबंधन की राजनीति भी बंद कोठरी से बाहर आने लगी है। बिहार में महागठबंधन के घटक दलों को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने एक मंच पर लाने की कोशिश की। शुक्रवार को सोनिया की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बुलाई गई विपक्ष की मीटिंग के मुद्दे वैसे तो राष्ट्रीय थे, किंतु बिहार में सबको एक प्लेटफॉर्म पर लाकर सोनिया ने विपक्ष की राजनीति को गतिशील कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि सब एकजुट होकर राज्य एवं केंद्र सरकार के पास पहले अपनी बात रखें और जरूरत पड़ी तो आंदोलन भी करें। 

विपक्ष की सलाह नहीं सुनती सरकार 

बिहार से राजद के वरिष्ठ नेता तेजस्वी यादव, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) प्रमुख जीतनराम मांझी, रालोसपा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने शिरकत की। सबने एक स्वर से लॉकडाउन के दौरान दूसरे राज्यों से लौट रहे कामगारों के हालात एवं केंद्र-राज्य सरकार से मिलने वाली मदद की सच्चाई बताई। सबने कहा कि सरकार उनकी सलाह भी नहीं सुनती है। 

कामगारों को रीढ़ बताया

सोनिया गांधी ने सबकी बातों से सहमति जताते हुए कामगारों को देश की रीढ़ बताया और कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर इस रीढ़ को बर्बाद कर रही है। विपक्ष ऐसा नहीं करने देगा। कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री से बिहार के लिए विशेष दर्जा और विशेष पैकेज की मांग की और इसके लिए संयुक्त विपक्ष को एकजुट होकर आगे बढऩे के लिए प्रेरित किया। सोनिया से मंत्र लेने के बाद सभी दल सबसे पहले प्रधानमंत्री एवं राष्ट्रपति को पत्र लिखकर बिहार के हक की मांग करेंगे। उसके बाद पांच सदस्यीय समिति बनाकर आंदोलन की रूपरेखा तय करेंगे। 

प्रत्येक परिवार को मिले हर माह आठ हजार : तेजस्वी 

तेजस्वी यादव ने सोनिया से कहा कि हम सबको मिलकर सरकार पर दबाव बनाना चाहिए कि गरीब परिवारों को अगले छह महीने तक आठ हजार रुपये प्रतिमाह नकद दिया जाए। आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने कहा भी है कि सरकार 65 हजार करोड़ से गरीबों की मदद कर सकती है। राशन कार्ड नहीं भी तो भी प्रत्येक परिवार को खाद्यान्न दिया जाए। तेजस्वी ने श्रम कानूनों में बदलाव के प्रयासों का भी विरोध किया और कहा कि संसद में चर्चा किए बिना यह असंवैधानिक है। 

संयुक्त विपक्ष सांकेतिक विरोध करे : कुशवाहा 

रालोसपा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि विपक्ष को एकजुट होकर एक्शन प्लान बनाना चाहिए और सरकार की नीतियों के खिलाफ सांकेतिक हड़ताल करनी चाहिए। लॉकडाउन में रोड पर निकलना संभव नहीं है तो लोग घरों में ही रहकर ऐसा कर सकते हैं। उसे सोशल मीडिया पर प्रचारित भी करें। सभी दलों के प्रमुख नेता अगर दो घंटे भी बैठेंगे तो सरकार के कार्यों से पर्दा उठाया जा सकता है। उपेंद्र कुशवाहा ने ऑनलाइन पढ़ाई को गरीब बच्चों के विरुद्ध बताया और कहा कि जिनके पास संसाधन नहीं है, वे कैसे पढ़ेंगे? 

कामगारों के लिए नीति बनाए सरकार : मांझी 

हम प्रमुख जीतनराम मांझी ने कुशल कामगारों के लिए केंद्रीय नीति बनाने की बात की और कहा कि इससे एक तरफ लोगों को रोजगार मिलेगा और दूसरी तरफ देश की अर्थव्यवस्था में सुधार होगा। उन्होंने बिहार में कुटीर एवं लघु उद्योगों को बढ़ावा देकर मजदूरों के सामने आए रोजी-रोटी के संकट को तत्काल दूर करने का सुझाव दिया। सरकार पर दबाव बनाने के लिए उन्होंने संयुक्त विपक्ष से संकल्प के साथ जुट जाने की अपील की। 

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