Home विदेश बुजुर्गों में संक्रमण से मौत का खतरा ज्‍यादा पर ईरान में 107 वर्षीय दादी ने कोरोना को हराया

बुजुर्गों में संक्रमण से मौत का खतरा ज्‍यादा पर ईरान में 107 वर्षीय दादी ने कोरोना को हराया

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दु‍बई/लंदन । बुजुर्गों में कोरोना संक्रमण के चलते मौत का खतरा ज्‍यादा है लेकिन इनके रिकवर होने के कई ऐसे मामले भी सामने आ रहे हैं जो चौंकाते हैं। ऐसा ही एक वाकया ईरान में हुआ है जहां 107 साल की एक बुजुर्ग महिला ने कोरोना को शिकस्‍त दी है। समाचार एजेंसी रॉयटर के मुताबिक, 107 साल की सल्तनत अकबरी को अराक शहर के खानसारी अस्पताल (Khansari hospital) में भर्ती कराया गया था लेकिन कुछ ही समय आइसोलेशन में विताने के बाद वह ठीक हो गईं जिसके बाद उन्‍हें घर भेज दिया गया।

ऐसे में जब इस वायरस का बुजुर्गों के लिए खतरा ज्‍यादा है… सल्तनत अकबरी (Saltanat Akbari) की रिकवरी सुकून देती है। इससे पहले ईरान की ही एक 103 वर्षीय महिला कोरोना को शिकस्‍त दे चुकी हैं। राजधानी तेहरान से 180 किलोमीटर दूर सेमनान अस्पताल में भर्ती रहीं इस महिला का नाम जाहिर नहीं किया गया था। समाचार एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक, देश के दक्षिण-पूर्वी इलाके केरमान में भी एक 91 वर्षीय वृद्ध ने कोरोना संक्रमण से रिकवरी पाई थी। यही नहीं इनको हाई ब्लड प्रेशर और अस्थमा की समस्‍या भी थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी डॉक्टरों ने यह नहीं बताया था कि इन वरिष्ठ नागरिकों को अस्पताल में क्या दवाएं दी गई थीं। इतना ही नहीं अभी हाल ही में भारत के इंदौर शहर में एक 95 साल की महिला ने कोरोना संक्रमण को शिकस्‍त दी थी। ऐसे में इन बुजुर्गों पर वही पुरानी कहावत ठीक बैठती है कि जाको राखे साईयां मार सके ना कोय… हालांकि ब्रिटिश शोधकर्ताओं ने एक अध्‍ययन में पाया है कि कोरोना संक्रमण से होने वाली मौतों में ज्‍यादा उम्र, पुरूष होना और पहले से मधुमेह, श्वसन और फेंफड़ा संबंधी जैसी गंभीर बीमारियों से ग्रस्त होना एक महत्वपूर्ण कारक के तौर पर सामने आया है।

बीएमजे में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक, 50 वर्ष से ज्यादा उम्र के प्रौढ़, पुरुषों, मोटापा, हृदय रोग, फेंफड़ा, लीवर और किडनी से जुड़ी बीमारियों से जूझ रहे लोगों को कोरोना संक्रमण से मौत का खतरा ज्यादा है। ब्रिटेन के लिवरपूल विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने इंग्लैंड में अस्पताल में भर्ती हुए कोरोना मरीजों के आंकड़ों का विश्लेषण करके यह नि‍ष्‍कर्ष निकाला है। अध्ययन में 43 हजार से ज्यादा मरीजों को शामिल किया गया था। वैज्ञानिकों की मानें तो छह फरवरी से 19 अप्रैल के बीच इंग्लैंड, वेल्स और स्कॉटलैंड के 208 अस्पतालों में भर्ती 20,133 मरीजों पर यह अध्‍ययन किया गया।

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