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बिहार में नीतीश कुमार की सरकार ने दलित बाहुल्य गांवों को आदर्श गांव बनाने की प्राथमिकता तय की

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पटना: बिहार की नीतीश कुमार कीसरकार पिछड़े और दलित बाहुल्य गांवों को संवारने का कार्य करने जा रही है। इन्‍हें आदर्श गांव बनाने की तैयारी है। इसके लिए जो पैमाना तय किया है, उसके तहत प्रत्येक गांवों को इंटरनेट से जोड़ा जाएगा। साथ ही प्रत्येक घर तक नल का जल पहुंचाया जाएगा, ताकि ग्रामीणों को साफ पीने का पानी उपलब्‍ध हो सके। सरकार ने ऐसे गांवों की सूची तैयार करने को कहा है जहां इंटरनेट समेत अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।

सरकार ने दलित बाहुल्य गांवों को आदर्श गांव बनाने की प्राथमिकता नये सिरे से तय करने का निर्देश दिया है। ऐसे गांवों में इस तरह की सभी बुनियादी सुविधाओं से जोड़ा जाएगा, जो कि सम्मानजनक जीवन जीने के लिए जरूरी हो।

सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि राज्य में 8300 पंचायतों में पिछड़े एवं दलित बाहुल्य गांवों को चिन्हित करने का कार्य जल्द शुरू किया जाएगा। वर्ष 2024-25 तक प्रदेश के 4500 ऐसे गांवों के कायाकल्प की योजना है, जहां मौजूदा समय में दलितों की आबादी पांच सौ या इससे अधिक है। फिलहाल गांवों के विकास का खाका तैयार भी जल्द तैयार किया जाएगा। खास बात यह है कि योजना के तहत सरकार की ओर से जहां प्रत्येक गांव को 21 लाख रुपए दिए जाने का प्रावधान किया गया है।

साथ ही गांवों के विकास को लेकर केंद्र और राज्य की ओर से चलायी जाने वाली योजनाओं को भी एकीकृत कर इनसे जोड़ा गया है। इससे गांवों के विकास कार्य में तेजी लाने में मदद मिलेगी। साथ ही, प्रत्येक घर तक नल-जल की पहुंच और साफ पानी की आपूर्ति ठीक से हो रही है या नहीं, इसकी साप्ताहिक समीक्षा भी कराएगी। इस बार में हाल में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के स्तर से समीक्षा बैठक मेंं अफसरों को निर्देश भी दिये गए हैं।

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