Home किशनगंज आदिवासी सेंगल अभियान के तहत पांच सूत्री मांगों को लेकर रविवार को प्रदर्शन किया

आदिवासी सेंगल अभियान के तहत पांच सूत्री मांगों को लेकर रविवार को प्रदर्शन किया

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किशनगंज: आदिवासी सेंगल अभियान के तहत पांच सूत्री मांगों को लेकर रविवार को प्रदर्शन किया गया। बस स्टैंड के समीप एनएच 31 पर प्रदर्शन करते हुए आदिवासियों ने प्राकृतिक पूजक सरना धर्म कॉलम कोड को 2021 की जनगणना में हर हाल में शामिल करने की मांग की। मौके पर आदिवासी सेंगल अभियान के प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ टुडू ने सरकार से पांच सूत्री मांग पूरा करने के लिए प्रदर्शन किया जा रहा है।

जिसमें सरना धर्म कोड, झारखंड में संथाली प्रथम राजभाषा, झारखंडी डोमिसाइल, आसाम-अंडमान के झारखंडी आदिवासियों को एसटी का दर्जा देने, वीर शहीद सिद्धो मुर्मू और बिरसा मुंडा के वंशजों के लिए ट्रस्ट बनाने की मांग शामिल है।

उन्होंने कहा कि आदिवासियों को 2021 में होने वाली जनगणना में धार्मिक पहचान और मान्यता के साथ शामिल होने का न्याय व अधिकार प्रदान किया जाए। वैसे तो आदिवासियों को अनुच्छेद 342 के तहत आदिवासी या एसटी का दर्जा प्राप्त है। लेकिन अनुच्छेद 25 के तहत धर्म का मामला अब तक लंबित है। जो आदिवासियों के अस्तित्व, पहचान और हिस्सेदारी के लिए जरूरी है।

आदिवासियों के लिए सरना धर्म कोड का मुद्दा उनके मौलिक अधिकार के साथ मानवीय अधिकार का मामला भी है। पांच प्रदेश के आदिवासी सेंगल अभियान के प्रतिनिधियों ने सितंबर व अक्टूबर में केंद्र सरकार और राष्ट्रपति को पत्र भेजकर अपनी मांगों से अवगत करवा चुके हैं। जिसमें 30 नवंबर तक केंद्र सरकार द्वारा सरना धर्म कोड की मान्यता के लिए घोषणा करने की मांग की गई थी।

ऐसा नहीं करने पर छह दिसंबर को आदिवासी सेंगल अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह पूर्व सांसद सालखन मुर्मू के आह्नान पर बिहार, बंगाल, असम, उड़ीसा और झारखंड में भी चक्का जाम करने पर विवश हो गए। जब तक मांगे पूरी नहीं होगी तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

इस दौरान एसडीएम शहनवाज अहमद नियाजी सड़क जाम कर रहे आदिवासी सेंगल अभियान के सदस्यों से मिले। मौके पर प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ टुडू ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। एसडीएम ने कहा कि आपकी मांगों को सरकार तक पहुंचाया जाएगा। जिसके बाद आदिवासियों द्वारा सड़क जाम हटाया गया। इस दौरान मुख्य रूप से जिलाध्यक्ष राजा मरांडी, जवाहर हेम्ब्रम, बुधू किस्कू, दुलाल मरांडी, मरांग बेसरा, मंडल टुडू, लखन सारेन, गधेश हेमब्रम, ढेना सोरेन, लखीराम हांसदा, ठाकुर मरांडी, बालाकृष्ण किस्कू सहित दर्जनों आदिवासी समुदाय के लोग मौजूद थे।

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