Home पटना बिहार में लगभग 40 हजार वकील बेरोजगारी की कगार पर, क्यों पड़ा इस व्यवसाय पर बुरा असर

बिहार में लगभग 40 हजार वकील बेरोजगारी की कगार पर, क्यों पड़ा इस व्यवसाय पर बुरा असर

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पटना:  कोरोना काल में न्याय पाने की उम्मीद में भटक रहे आम लोगों के साथ-साथ वकालत के व्यवसाय से जुड़े लोगों की परेशानी भी बढ़ गई है। बिहार में करीब एक लाख वकील हैं, लेकिन अदालतों में पिछले करीब नौ महीने से फेस टू फेस सुनवाई नहीं होने के चलते इस पेशे से जुड़े लोगों की आय पर बुरा असर पड़ा है। लंबित मुकदमों की संख्या भी बढ़ रही है। राज्य की अदालतों में करीब तीस लाख से अधिक मुकदमे लंबित हैं, और इनकी संख्या लगातार बढ़ रही।

सिर्फ पटना हाईकोर्ट में ही लंबित मामलों की संख्या एक लाख 65 हजार से ज्यादा है, जबकि निचली अदालतों 29 लाख मामले सुनवाई की प्रतीक्षा में हैं। कोरोना के चलते होली की छुट्टी के बाद से ही हाईकोर्ट और अधीनस्थ न्यायालयों में फिजिकल सुनवाई नहीं के बराबर हो रही है। इससे करीब 40 फीसद वकीलों के सामने रोजी-रोजगार की समस्या आ गई है। करीब 60 फीसद वकील ही किसी तरह रोजी-रोटी का जुगाड़ कर पाने में सक्षम हैैं। बाकी के सामने गंभीर चुनौती है। 

लंबित मामले 

पटना हाईकोर्ट में 

सिविल – 95,000 

क्रिमिनल – 70,000 

निचली अदालतों में 

क्रिमिनल – 25.50 लाख 

सिविल – 4 लाख 

वकीलों को किसी अन्य माध्यम से आजीविका अर्जित करने की अनुमति नहीं है। एडवोकेट एक्ट 1961 की धारा 49 के मुताबिक बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने वकीलों को किसी अन्य तरह का रोजगार करने से रोक लगा दी है। पटना हाईकोर्ट के अधिवक्ता रत्नेश कुमार सिंह के मुताबिक चाहे वह सरकारी हो या गैर सरकारी वकालत के अलावा कोई और व्यवसाय नहीं कर सकते हैैं। 

बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के मुताबिक केंद्र सरकार सुनियोजित तरीके से वकालत पेशे पर ग्रहण लगाना चाहती है। केंद्र ने बार काउंसिल को पत्र लिखकर कहा है कि कोरोना काल के बाद भी अदालतें फिजिकल और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से चलती रहेंगी। इसका मतलब हुआ कि केंद्र सरकार वकालत को अपने शिकंजे में लेने का प्रयास कर रही है, जिसका विरोध किया जाएगा। 

पटना हाईकोर्ट के तीनों अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष एवं वरीय अधिवक्ता योगेश चंद्र वर्मा ने कहा कि राज्य सरकार को वकीलों की समस्याओं के मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए। प्राकृतिक आपदा मानते हुए सरकार को वकीलों की रोजी-रोटी के लिए भी सोचना चाहिए। बिहार स्टेट बार काउंसिल के उपाध्यक्ष धर्मनाथ यादव ने कहा कि कोरोना के चलते नौ महीने से अदालतों में केवल वेतन भोगी कर्मचारी ही सुकून में हैं। बाकी सबका बुरा हाल है। 

ऐसे बाधित है वकालत व्यवसाय

-निचली अदालतों में गवाही नहीं चल रही है। वेलफेयर स्टांप की बिक्री नहीं हो रही है। वकील एसोसिएशन को घाटा हो रहा है। 

– वर्चुअल सुनवाई के लिए कम रोजगार करने वाले वकीलों के पास स्मार्ट मोबाइल और लैपटॉप नहीं है। 

* लंबित सिविल मामलों की सुनवाई अरसे से नहीं चल रही है। इससे सिविल मामलों के जानकार वकील बेरोजगारी के कगार पर हैं। 

– वकीलों के साथ उनसे जुड़े हुए लोग जैसे वकीलों के क्लर्क, अदालतों में दुकान एवं किताब बेचने वाले भी प्रभावित हैैं। 

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