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किसान आंदोलन आज 14 वां दिन भी जारी रहा, कोर्ट में अपील का हक की मांग

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नई दिल्ली: मोदी सरकार के कृषि कानूनों की वापसी के लिए किसानों का आंदोलन 14 दिन से जारी है। अब तक सरकार से किसानों की पांच दौर की बातचीत हो चुकी है, जिसका फिलहाल कोई नतीजा नहीं निकला है।

किसान अपनी सभी मांगों पर अड़े हुए हैं. सरकार ने भी अपनी मंशा जाहिर कर दी है कि कृषि कानून वापस नहीं लिए जाएंगे। इस बीच सरकार आज किसानों को कृषि कानूनों पर कुछ संशोधन को लेकर लिखित प्रस्ताव भेजने जा रही है।

इसमें किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य में छेड़छाड़ नहीं करने, मंडियों को पहले की तरह बरकरार रखने का भरोसा दिया जा सकता है।

इसके पहले मंगलवार को गृहमंत्री अमित शाह की किसानों के साथ बैठक हुई। अमित शाह के साथ बैठक के बाद किसान नेताओं का बयान आया है कि आज सरकार लिखित प्रस्ताव देगी, लेकिन आज सरकार और किसानों में कोई मीटिंग नहीं होगी।

सरकार से जो लिखित प्रस्ताव मिलेगा, उस पर किसान प्रतिनिधि अपनी कमेटी में चर्चा करेंगे और तब आगे की रणनीति तय होगी। इसी के लिए आज दोपहर 12 बजे किसानों की बैठक होने जा रही है।

दरअसल, अमित शाह के साथ किसानों की मीटिंग की शुरुआत ही अप्रत्याशित थी। भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने मंगलवार दोपहर घोषणा की कि 13 किसान नेता शाम 7 बजे गृह मंत्री अमित शाह से मिल रहे हैं, लेकिन निर्धारित समय से एक घंटे पहले ही ये मुलाकात हो गई।

टिकैत शाह के कृष्ण मेनन मार्ग स्थित आवास के बाहर अपने वाहन में बैठे थे। उन्होंने कहा ‘हम सभी एक दल में आ रहे थे। मेरी कार अलग हो गई। अब मुझे नहीं पता कि बैठक स्थल कहां हैव्। हमें लगा कि यह मंत्री के आवास पर है।’

वहीं, पंजाब किसान यूनियन के रुदलू सिंह मनसा भी इस अप्रत्याशित मीटिंग से नाराज दिखे। उन्हें अमित शाह के आवास के बाहर पुलिस ने रोक दिया। पूछने पर बताया गया कि अंदर कोई मीटिंग नहीं है।

पुलिस का कहना था कि किसान नेता गलतफहमी में थे। इसपर मनसा बताते हैं, ‘मैं सिंघु बॉर्डर पर वापस चला गया। हमारे साथ व्यवहार करने का कोई तरीका नहीं है। पहले मीटिंग के लिए फोन किया जाता है, फिर बताया जाता है कि कोई बैठक नहीं है। ‘

आखिरकार, मनसा और टिकैत दोनों पूसा संस्थान में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की बैठक स्थल पर पहुंचे. ये मीटिंग करीब रात 9 बजे तक चली। इसमें कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर कुछ ही मिनट के लिए शामिल हुए।

इस दौरान अमित शाह ने चर्चा के बाद मंशा जाहिर कर दी कि सरकार कृषि कानूनों को वापस नहीं लेगी। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए कानून में संशोधन के लिए विकल्प खुले रखी हुई है।

शाह ने कहा कि सरकार जो संशोधन करने को तैयार थी, उसका एक औपचारिक प्रस्ताव बुधवार तक किसानों को भेज दिया जाएगा। इसपर किसान नेता नाखुश दिखे। जिसके बाद उन्होंने बुधवार दोपहर को विज्ञान भवन में होने वाली छठे दौर की बातचीत में शामिल नहीं होने का फैसला किया।

अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव हन्नान मुल्ला ने कहा, ‘बुधवार को किसानों और सरकार के बीच कोई बैठक नहीं होगी।

गृहमंत्री ने कहा है कि आज किसान नेताओं को एक प्रस्ताव दिया जाएगा। प्रस्ताव मिलने के बाद किसान नेता सिंघु बॉर्डर पर मीटिंग पर इसपर चर्चा करेंगे और आगे क्या करना है, ये तय किया जाएगा।

जानकारी है कि कल की मीटिंग में भी वही सब हुआ, जो पिछली बातचीत में होता आ रहा है। बैठक में किसानों ने तीनों बिलों को रद्द करवाने की मांग दोहराई, वहीं, सरकार ने भी कानूनों में संशोधन करने का अपना प्रस्ताव दोहराया।

अधिकारियों ने संकेत दिया कि कृषि कानूनों पर किसानों को प्रस्ताव में कुछ लिखित आश्वासन दिए जा सकते हैं। इसमें न्यूनतम समर्थन मूल्य को समाप्त नहीं किया जाएगा।

प्रस्ताव में इसका भी आश्वासन दिया जा सकता है कि APMC मंडी प्रणाली नए कानूनों से प्रभावित नहीं होगी। मंडियां पहले की तरह बरकरार रहेंगी।

सरकार द्वारा प्रस्तावित कानून के अन्य संशोधनों में विनियमित मंडियों के बाहर व्यापार के लिए निजी व्यापारियों के रजिस्ट्रेशन और सरकारी पोर्टल पर अपना विवरण डालने के लिए मानदंड शामिल हो सकते हैं।

वहीं, एपीएमसी मंडियों और निजी लोगों के लिए समान कर स्तर को सुनिश्चित करने से जुड़े विवादों के मामले में अदालत जाने का अधिकार भी अब किसानों के दिया जा सकता है। इस प्रस्ताव को अंतिम रूप देने के लिए मोदी कैबिनेट बैठक करने जा रही है।

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