Home बड़ी खबर ब‍िहार के क‍िसान फूलगोभी की कीमत एक रुपये होने से परेशान होकर उसको खेतों में जमींदोज करने को व‍िवश,अभी यह ताजा मामला समस्‍तीपुर ज‍िले के कल्‍याणपुर से आया

ब‍िहार के क‍िसान फूलगोभी की कीमत एक रुपये होने से परेशान होकर उसको खेतों में जमींदोज करने को व‍िवश,अभी यह ताजा मामला समस्‍तीपुर ज‍िले के कल्‍याणपुर से आया

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समस्‍तीपुर:  फसलाेें की कीमत को लेकर व‍िगत 20 द‍िनों से पूरे देश में सरकार और क‍िसानों के बीच महाभारत जारी है। वहीं ब‍िहार के क‍िसान सब्‍जी की फसल का उच‍ित मूल्‍य नहीं म‍िलने से परेशान होकर उसको खेतों में जमींदोज करने को व‍िवश हैं। अभी यह ताजा मामला समस्‍तीपुर ज‍िले के कल्‍याणपुर से आया है। जहां एक क‍िसान फूलगोभी की कीमत लागत मूल्‍य से भी बहुत कम म‍िलने के कारण उसने इसे खेतों में दफन कर द‍िया। 

ज‍िले के कल्याणपुर मुक्तापुर न‍िवासी किसान ओम प्रकाश यादव ने फूलगोभी की कीमत एक रुपये किलो होने पर अपने एक बीघा खेत में लगे फूलगोभी को ट्रैक्टर से मिट्टी में गाड़ दिया। उनका कहना है क‍ि खेत में लगे फूलगोभी को काटने में मजदूर को जो मजदूरी देनी पड़ रही वह भी जब निकल नहीं पा रहा तो फ‍िर इसे रखने का क्‍या फायदा। कहा, ऋण लेकर सब्जी की खेती की थी। इससे बहुत उम्‍मीद पाल रखा था लेक‍िन,काफी नुकसान हुआ है।

इसकी भरपाई कैसे होगी, कहा नहीं जा सकता। यह अकेले ओम प्रसाद की हालत नहीं है। वरन इस इलाके के सैकड़ों क‍िसान यही रोना हो रहे। आश्‍चर्य की बात यह है क‍ि समस्‍तीपुर व मुजफ्फरपुर जैसे शहर में यही फूलगोभी 20 से 30 रुपये प्रत‍िक‍िग्रा की दर से ब‍िक रही। इससे यह साफ साबि‍त हो रहा क‍ि क‍िसानों की कड़ी मेहनत का फायदा एक बार फ‍िर ब‍िचौल‍िए ले उड़े।

फूलगोभी के बाजार भाव नहीं मिलने को लेकर किसानाेें में आक्रोश है।ओम प्रकाश बताते हैं क‍ि बगल में सब्जी की मंडी होने के कारण मैंने अपने खेत में उन्नत प्रभेद की फूलगोभी स्थानीय कृषि समन्वयक के बताए वैज्ञानिक तरीके से लगाई। जैविक खाद का प्रयोग किया। फूल भी अच्छा हुआ। लेक‍िन, बाजार मूल्य एक रुपये किलो होने से मैं निराश होकर खेत में ट्रैक्टर चलवा दिया हूं। इससे सब्जी उत्पादकों में काफी आक्रोश पनप रहा है। पूरे देश में विगत 19 दिनों से इसी को लेकर किसान आंदोलन भी हो रहा है।

पूर्व में प्रखंड क्षेत्र के अजना पंचायत स्थित मंजिल मुबारक के युवा किसान पंकज कुमार साह को साढे चार एकड़ में लगे बंधा गोभी को बाजार भाव नहीं रहने को लेकर खेत में ही गाड़ना पड़ा। इसको लेकर किसान ने प्रधानमंत्री नरेंद मोदी से लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, जिलाधिकारी जिला उद्यान पदाधिकारी, जिला सहकारिता पदाधिकारी प्रखंड कृषि पदाधिकारी तक का दरवाजा खटखटाया। कोई फायदा नहीं हुआ। बैंकों के ऋण से किसान लाखों के कर्ज में डूबे हैं। कहा क‍ि 20 कट्ठा खेती करने में मुझे कुल 80 हजार रुपये खर्च हुए थे। 

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