Home Breaking News भाजपा बिहार में किसान सम्‍मेलन और किसान चौपाल लगाकर नए कृषि कानूनों के फायदे गिना रही, वहीं राजद ने इसे ढकोसला बताया

भाजपा बिहार में किसान सम्‍मेलन और किसान चौपाल लगाकर नए कृषि कानूनों के फायदे गिना रही, वहीं राजद ने इसे ढकोसला बताया

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पटना: भाजपा प्रदेश अध्‍यक्ष डॉ संजय जायसवाल ने कहा है कि पार्टी आगामी 25 दिसंबर तक बिहार में 99 किसान सम्‍मेलन और 243 किसान चौपालों के जरिए बिहार के किसानों की नए कृषि कानूनों के बारे में गलतफहमी दूर करेगी। इधर नेता प्रतिपक्ष तेजस्‍वी यादव ने कहा है कि राजद के कार्यकर्ता किसानों को बताएंगे कि किस तरह ये कानून कृषि विरोधी हैं। राजद ने सोमवार (14 दिसंबर) को इन कानूनों के खिलाफ और किसानों के आंदोलन के पक्ष में जिला मुख्यालयों पर धरना भी दिया। प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद ने दावा किया कि धरना में किसानों की बड़ी भागीदारी हुई। जगदानंद ने कहा कि पूरी पार्टी किसान आंदोलन के पक्ष में खड़़ी है।

केंद्र सरकार का नया कृषि कानून किसानों के हित में है। इसके जरिए 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य है। यह बातें भाजपा के पूर्व मुख्य सचेतक और विधायक अरुण कुमार सिन्हा ने पटना महानगर की ओर से कृषि कानून के समर्थन में आयोजित प्रेस वार्ता में कही।

उन्होंने कहा कि बिचौलिये अपने फायदे के लिए भ्रमजाल फैलाकर अराजकता का माहौल बना रहे हैं। नए कानून ने किसान को यह अधिकार दिया है कि वो अपने उत्पाद को बाहर जाकर भी अन्य बाजारों में बेच सकता है। प्रदेश प्रवक्ता प्रेमरंजन पटेल ने कहा कि इस कानून का सबसे बड़ा नुकसान मुनाफाखोरों और बिचौलियों को हुआ है, इसीलिए पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इलाकों में जहां मुनाफाखोरों का किसानों के जिंदगी में ज्यादा दखल है वहां ज्यादा विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है।

महानगर अध्यक्ष अभिषेक कुमार ने बताया कि किसानों को इस कानून की उपलब्धियां बताने के लिए 20 दिसंबर को पटना महानगर के सभी विधानसभा क्षेत्रों में सभा की जाएगी जिसमें स्थानीय विधायक के साथ साथ प्रदेश स्तर के नेता तथा किसान शामिल होंगे।

राजद के प्रवक्ता चितरंजन गगन ने बताया कि भाजपा की ओर से आयोजित किसान चौपाल ढकोसला है। किसान इनके झांसे में नहीं आ रहे हैं। दूसरे राज्यों की तुलना में बिहार के किसानों में अधिक नाराजगी है। यही कारण है कि विधानसभा चुनाव में धान का कटोरा कहे जाने वाले राज्य के इलाके में एनडीए का खाता नहीं खुल पाया। राज्य में 15 ऐसे जिले हैं, जहां विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ जदयू का खाता तक नहीं खुला।

उन्होंने बताया कि राजद के कार्यकर्ता गांवों में जाकर मुख्यमंत्री के इस दावे की पोल खोलेंगे कि राज्य में 2006 में ही मंडी व्यवस्था समाप्त कर दी गई थी। कार्यकर्ता बताएंगे कि मंडी व्यवस्था खत्म होने के बाद राज्य के किसानों की माली हालत और खराब हुई। एक सर्वेक्षण का आंकड़ा बताता है कि राज्य के किसानों की औसत सालाना आय 42,684 रुपये है।

यह राष्ट्रीय औसत 77, 124 रुपये से काफी कम है। पंजाब और हरियाणा  के किसानों की औसत आय क्रमश: दो लाख,16 हजार 708 और एक लाख 73 हजार रुपये से अधिक है। सालाना आय के मामले में राज्य के किसान अंतिम पायदान पर हैं।  

राजद प्रवक्ता ने कहा कि बिहार में पैक्स के माध्यम से धान और गेहूं खरीदने की व्यवस्था है।  पर इसकी प्रक्रिया इतनी जटिल बना दी गई है कि न तो किसान अपने उत्पाद को पैक्स के माध्यम से बेचना चाहते हैं और न पैक्स ही किसानों से खरीदना चाहती है। किसान अपने उत्पाद को बिचौलियों के माध्यम से औने-पौने दाम में बेचने को मजबूर होते हैं।

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