Home झारखंड झारखंड: हेमंत सरकार ने पूरे किए 2 साल, कहा- पैदा हुआ डर और भय का माहौल अब खत्म..

झारखंड: हेमंत सरकार ने पूरे किए 2 साल, कहा- पैदा हुआ डर और भय का माहौल अब खत्म..

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सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि उन्हें सबसे अधिक संतोष इस बात से है कि राज्य में 2014 के बाद पैदा हुआ डर और भय का माहौल अब खत्म हो गया है। उनको दो वर्षों के शासन में सबसे अधिक सुकून इस बात से है कि ब्लॉक, जिला और राज्य स्तर मुख्यालय में बैठे रहने वाले अधिकारी पूरे सरकारी महकमे के साथ अब गांव, पंचायत और लोगों के घरों तक पहुंच रहे हैं। रात दो बजे तक लोगों की समस्यायें न सिर्फ सुनी जा रही हैं बल्कि पदाधिकारी जमीन पर बैठ कर उसका समाधान भी कर रहे हैं।

पेंशन, राशन सहित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के हक के लिये 20 वर्षों से तरस रहे लोगों का यह काम बिचौलियों का मकड़जाल खत्म करके मिनटों में पूरा किया जा रहा है। शासन निठल्ला नहीं होता, शासक होता है। सरकार सजग रह कर लिये गये निर्णय पर पदाधिकारियों से काम कराती है।

मुख्यमंत्री अपनी सरकार के दो वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में करीब दो घंटे तक पत्रकारों के सवालों का जवाब देते रहे। इस दौरान उन्होंने दो वर्षों का रिपोर्ट कार्ड और भविष्य का रोडमैप भी प्रस्तुत किया। आपके अधिकार, आपकी सरकार, आपके द्वार कार्यक्रम के माध्यम से करीब 35 लाख प्राप्त आवेदनों में से 25 लाख से अधिक का ऑन द स्पॉट समाधान कर दिया गया। इसमें केवल पेंशन के लिये 3.70 लाख आवेदन आये जिसमें 2.45 लाख नये पेंशन लाभुक इस कार्यक्रम के माध्यम से जुड़े हैं। इन्हें जल्द पेंशन की राशि महीने की पांच तारीख को मिलने लगेगी।

जेपीएससी पर उठे विभाग से जुड़े सवाल पर मुख्यमंत्री ने सरकार के हस्तक्षेप से संबंधित एक भी मामला सामने लाकर दिखाने की खुली चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि यह स्वतंत्र संस्था है और सरकार का इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं है। उन्होंने कहा कि पिछले 20 वर्षों से जेपीएससी या जेएसएससी की परीक्षा नियमावली नहीं बनाई गई।

मुख्यमंत्री ने सत्तासीन गठबंधन के घटक दलों के बीच बीस सूत्री समितियों के पदों के बंटवारे पर कहा कि गठबंधन की सरकार में सबको मिलकर निर्णय लेना है। उन्होंने अपनी सहमति दे दी है। अब सहयोगी दलों से मसले पर सवाल होना चाहिये। 

मंत्री ने कहा कि सरकार तमाम विभागों की मैराथन समीक्षा करते आई है। मंत्रिमंडल में फेरबदल की परंपरा झारखंड में नहीं रही है। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि मंत्री परिषद की संख्या बढ़ाई भी तो जा सकती है। उनका इशारा 12 वें मंत्री के खाली पद की ओर था। हालांकि उन्होंने इस विषय को समेटते हुए कहा कि मंत्रिमंडल में बदलाव जैसी बात होगी तो इसकी जानकारी सार्वजनिक की जाएगी, लेकिन फिलहाल अभी ऐसी जरूरत महसूस नहीं हो रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में केंद्र सरकार के कई उपक्रम हैं। निजी क्षेत्र की कंपनियां सीमित संख्या में है। राज्य सरकार को केंद्रीय उपक्रमों को संचालित करने का अनुभव नहीं है। यदि होता तो एचईसी के अधिग्रहण से इनकार नहीं करते। इतनी देरी नहीं होती। इसका नकारात्मक परिणाम यहां के लोगों को भुगतना पड़ेगा। यही महाजनी है।

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